'via Blog this'दिग्गी, अन्ना संघ से समर्थन प्राप्त कर रहे थे या किसी ओर से मुदा तो जनलोकापाल का हे पूरा देश इस मुदे पर एक हे तो आपके कथन के अनुसार कांग्रेस से बड़ा संघ हो गया हे फिर आप के पेट में दर्द क्यों हो रहा हे आप तो सक्त लोकपाल लाकर संघ से अपनी लकीर बढ़ी कर लीजिये ओर अपने छिछोड़ा पन से देश को मुक्ति दीजिये| में पूछना चाहता हूँ की प्रजातन्त्र का पट्टा सर्फ कांग्रेस के पास हे जिसके शारीर में अंग्रेजो का खून ओर आत्मा में फ़िरगियों का वास हो एसी कांग्रेस से तो बहतर हे संघ| कांग्रेस जो पिछले ५० वर्षों से सत्ता में रहकर अंग्रेजों की तरह चूस गई हे इस देश को उसे कांगेस के लिए जिसने फूट डालो ओर राज करो कि निति से देश को चलाया मुस्लिम समाज को पाठ पढाया कि हम आपके हितेसी हें हिन्दू आपके दुश्मन हें जबकी दोनों कोमो को रहना यहीं हे दोनों पर संविधन एक सा लागु होता हे पर कांगेस की तुस्टीकरण की निति से मुस्लमान कोम के दोनों हाथों में लड्डू हें जब जी चाहता हे संविधान मान लेते हें जब जी चाहता हे मुस्लिम ला की बातें करने लगते हें जो सरकार ठीक से संविधन को लागू नहीं करपाई आपस में लडवाती रही ओर राज करती रही एसी कांगेस कि बकालत , फिर बरी आइ कोटा प्रणली की उस पर पाँच दस साल राज किया फिर मंडल अगया,जात से जात को लडवा दिया इस तरह फूट डालो ओर राज करो की निति से ५० वर्ष पूरे किये कांग्रेस ने अब फिर से मुस्लमान को संघ का भय दिखा कर जनलोकपाल कि मुद्दे पर एक हुए देश के टुकड़े करने में लग गई हे कांगेस
फूट डालो राज करो
मछ्वारो के भेष में संपादक
ReplyDeleteजिंदल मामले में जी के संपादक हिरासत में लेलिये गए ये तो होना ही था अब जी वाले कह रहे हें की लेनदेन तो हुआ नहीं फिर किस बात की रिपोर्ट पत्रकारिता का पहला नियम हे की यदि आपके पास पर्याप्त साबुत हें तो किसी का वर्सन लेने की भी जरुरत नहीं हे जिसे वर्सन देना हे वह प्रेस आये लिखित में वर्सन दे और फिर भी यदि आपके पास साबुत पक्के हें तो वर्सन देने की भी जरुरत नहीं हे । पर जी के मामले में एसा नहीं हुआ ये कह रहे हें की हमने जाल बिछाया जल बिछाना प्रेस का कम नहीं हे आप अपने दायरे से बाहर गए और धरे गए साबुत के तोर पर आपने मेल भी किया लेनदेन की बातचीत भी की ये सब आपका कम नहीं था जो आप कर रहे थे ये आम धरना हे की अपने किसी के भी खिलाप मामला दिखाया या छापा आप पर यह तोहमत तो लगना ही हे की अपने पेसे मांगे नहीं दिए विज्ञपन माँगा नहीं दिया तो खबर दिखा दी या छाप दी इसी तोहमत से तो बचने के लिए ही तो उससे बातचीत भी नहीं की जाती आप ने तो मेल भी कर दिया अब आप कह रहे हें की हमने जल बिछाया था प्रेस का कम जल बिछाना नहीं हे इतना भी नहीं पता हे आप संपादक बन गए बड़े बड़े खुलासे करने लगे और धरे गए पूरे प्रेस जगत को कटघरे में खड़ा कर दिया क़ानूनी रूप से आप अपराधी हे जिंदल के भी और प्रेस जगत के भी
जिंदल के पास साबुत पक्के हें आप के पास सिर्फ और सिर्फ मर्सी अपील के अलावा कुछ नहीं चोथे स्तम्भ के नाम पर शायद आप को कोई रहत मिल जाये तो गनीमत हे आप के सी ओ अग्रवाल कह रहे थे की प्रेस के लिए यह काला दिन हे वाकई काला दिन हे जो आप जेसे मछुवारे जाल लेकर प्रेस की जमात में शामिल होगये हे और पूरे प्रेस जगत को बदनाम कर रहे हें .>>>>>> जय हिन्द
शिक्षा कर्मी की हड़ताल >>>>.प्रसाशन का कहना हे की नोकरी ज्वाइन करते वक्त इन्हें पता था की शर्तें क्या हें नोकरी में आने के बाद ये अतरिक्त मांग कर रहे हे जिससे शासन पर अतरिक्त वितीय बोझ बढ़ जायेगा जिसके ये पात्र नहीं हें। बात बिलकुल ठीक हे
ReplyDeleteशिक्षा कर्मिओं का कहना हे की हम से भी गधा सरकारी शिक्षक पेंतीस से चालीस हजार वेतन ले रहा हे और हम उससे अच्छी या बराबर की शिक्षा तो दे ही रहे हें तो हमें सर्फ और सर्फ दस हज़ार ही क्यों । सरकार और हड़तालियों में पेसे को
लेकर ठन गई हे । वहीँ पलकों का कहना हे की इनकी हड़तालों से हमारे बच्चों का भविष्य खतरे में हे इनका इस तरह येन परीक्षा के समय हड़ताल करना कानूनन अपराध हे ये छात्रो के अपराधी हें हड़ताली सत्र के शुरू में ही क्यों हड़ताल नहीं
और सरकार से दो टूक बात चित क्यों नहीं कर लेते यदि सरकार नहीं मानती तो ये नोकरी छोड़ क्यों नहीं देते इनसे अच्छे बेरोजगारों की लाइन लगी हे पलों की बात भी ठीक हे जबरन दो पाटों के बीच पिस रहा हे पिसते हुए पलक के दर्द को
कोन सहलाये । यह हे सरकारी शिक्षा की दुर्दसा शिक्षा की गेरेंटी योजना का ढिंढोरा पीटने वाली सरकारों की नाकामियां भर्ती प्रक्रिया में हुई धांधली का ही यह परिणाम हे की नेता किसिम के शिक्षकों की भारती होगी जो पढाई लिखी करने के एवज में
सरकार पर दबाब बनाने के लिए आने लगे सरकार बिलकुल सही हे की जब नोकरी मांगी तो शर्तों पर सहमती के हस्ताक्षर किये हें इन्हों ने अब उनको झुटला रहे हें ।
सरकार यदि चाहती हे की शिक्षा का स्तर वकिय सुधरे तो शिक्षक को वेतन तो अच्छा दिन ही पढ़ेगा इस बात पर कोई गोर क्यों नहीं होता की शिक्षा विशेषज्ञों की तनखा तो एवन हे उसे पढ़े लिखे विघयार्थी को शिक्षा देना हे पर उस जिसने उसे
इस शिक्षा को ग्रहण करने लायक बनाया उसे इतना निरीह क्यों की वह वेतन वीसंगतियो से तंग हो कर पत्थर तराशने ही छोड़ दे एसे में ये विशेषज्ञों को
दिल्ली की घटना को लेकर हो रही बयान बजी पर अब रोक लगना चाहिए नेता हों या समाज सेवी सभी को एक आवाज में यही कहना चाहिए की रेप जेसे घटना पर फंसी की सजा हो छेड़ छाड़ की घटनाओं पर पुलिश सक्ती से निपटे महिलाओं की शिकायत पर पुलिश गंभीरता से पड़ताल करे कोर्ट जल्द फेसले सुनाये महिलाएं को भी अपने ऊपर मर्यादा का बंधन स्वम रखना होगा महिलाये भी जानती हें की किस तरह के कपडे पहनने से उनकी मर्यादा कंहा भंग होती हे पुरुष भी मर्यादित रहें नारी की आजादी भी उतने ही जरुरी हे जितनी पुरुषों को आजादी हे पश्चात सभ्यता को उतना ही पहने जितना सभ्य समाज में चल सके नारी कमजोर नहीं हे पुरषों की बराबरी से आगे बढ़ रही हे उसे नीचा न दिखने दें हम सभी नारी और पुरुष इस घटना से सबक लें और प्रतिज्ञा लें की हम सभी मर्यादित रहेंगे कंही कोई कमुख काक्रोच दिखे उसे तुरत मारें स्वार्थी न बने और इन काकरोचों से ना डरें इनकी संख्या जद नहीं हे नारी की इज्जत करें जेसे हम अपने घरों में अपनी बहन माँ बेटी की करते हें नारी हमारे समाज का अहम् हिस्स्सा हे उसे उपभोग की वास्तु नासमझे हमारे पुरुष प्रधान समाज में यदि नारी नहीं तो हमारा अस्तित्व समाप्त हो जायेगा नारी को हम अदि शक्ति मानते हें उसकी कोमलता का उसकी ममता का नाजायज फायदा ना लें कुल मिलकर मर्यादित रहें नारी पुरुष एक दोसरे का सम्मान करें सभी मर्यादित रहें मर्यादित रहे मर्यादित रहें।।।।।।।।।।।।। जय हिन्द
ReplyDeleteसरकारी जिला चिट्टी ...... जनसंपर्क ने समाचार जरी किया जिले की चट्ठी उसका प्रसारण समय 9 बजे शुरू होगा और 9.5 पर समाप्त हो जायेगा सिर्फ और सिर्फ पांच मिनटों में जिले की सारी जन समस्याएं ,विकास , विरोध, जेसे विषयों को लेकर पत्र आमंत्रित किये हें उन सभी का वाचन पाच मिनिट में होना हे बताएं केसे संभव हे ।एसी योजनाओं पर जनता विश्वास नहीं करती पञ्च मिनिट में सिर्फ मुर्ख ही बनाया जा सकता हे अभी आगे भी समाचार आयेगा की फलां जिले से इतने हजार पत्र मिले हमारा कार्यकर्म काफी हद तक सफल रहा पर पढ़े सिर्फ पञ्च या छे समय समाप्त ..............जय हिन्द
ReplyDeleteअफजल को फंसी >>.>.अफजल को गुरु_ गुरु न कहा जाय ये तमाम गुरुओं की बेज्जती अफजल देश का अपराधी था उसे फंसी दी गई बस । दुःख इस बात का हे की देश के गृह मंत्री प्रेस से बात
ReplyDeleteकरते समय भरी मन से कह रहे थी की अफजल को फंसी हो गई हे एसा लग रहा था की रो देंगे न जाने क्यों कंग्रेसिओं को मुसलमानों में भारत की छवि दिखाई देती हे
न जाने क्यों कांगेस को वो देश भक्त लगते हें इतहास गवाह हे की जिन्ना से लेकर आज तक वो मानते ही नहीं की भारत उनका देश हे वो संविधान को मानते नहीं उनके अपने कानून हे
न जाने क्यों कांगेस को हिन्दू आतंकवादी दिखाई देते हे ।वो तो प्रणव दा ने इतहास रचा और दो मुस्लिम आतंकियो को फंसी दी कांगेस तो उनको मटन बिरयानी खिलाकर पाल रही थी
उनके रख रखाव पर करोडो रुपया खर्च करवा रही थी केसे कांग्रेस हे जो वोट बैंक के चक्कर दोस्त और दुश्मनों में फर्क नहीं कर पा रही हे>>>>>>> जय हिन्द
कुम्भ हादसा >>>>>>>>>>>> ये केसी श्रधा हे की दुबकी लगाई और मरते जीते घर की और भागे और मारे गए अरे इतनी श्रधा से गंगा स्नान में डुबकी लगाई तो थोडा मेले का आनन्द भी तो लो कुम्भ में आए साधू संतों के समागम का तो आनन्द लो की मरते जीते
ReplyDeleteपंहुच गए स्टेशन और मारे गए जनता यदि सब्र से कम लेती तो शायद हादसा नहीं होता मेला घूमते मेला का आनन्द लेते एक दिन बाद घर चले जाते तो क्या बिगड़ जाता जब इतनी जल्दी थी तो आये क्यों पुरेकुम्भ को कलंकित कर गए कोई पुलिश को कोस रहा तो कोई रेलवे को अरे खुद को भी तो सैयम रखना चाहिए सब्र रखना चाहिए की दुबकी लगाई और भागे ये केसी श्रधा हे>>>>>>>> जय हिन्द
काटजू के काज में जेटली का बटन >>>>>.काटजू जब तक मिडिया को सबक सीखते रहे नेता मजे लेते रहे पहली बार काटजू ने मिडिया के आइने से नेताओं की झलक दिखाई तो हंगामा हो गया काटजू कहते हे की हंगामा किस बात के एक ओर नेता कहते हे की संविधानिक पद स्वतंत्र रहे हमने स्वतंत्र होने की कोशिस की तो हंगामा हो गया तमाम बीजेपी के नेता गरिमा की दुहाई दे कर स्तीफा मांगने लगे किसे ने यह नहीं कहा की गलत लिखा हे संबिधान के खिलाप लिखा हे मोदी डिक्टेटर हे तो हे अमन और शांति से राज चलाना के जितने लिबरल मोदी को होना चाहियें हे इतहास गवाह हे की आज की कांग्रेस की तरह लिबरल होना देश की अखंडता को खतरा हे दिशा हीन कांगेस वोट के चकर में पिछले पचास वर्षो में पूरे भारत में संविधान को लागु नहीं करा पाई हे इस के परिणम आने वाली पीढ़ी को भुगतने होंगे ।
ReplyDeleteकाटजू ने जो कहा वह खुछ अलग नहीं हे अन्दर से कमजोर नेता प्रजातंत्र का मुखोटा लगाने की कोशिस कर रहे हें क्या बिहार में कानून व्यवस्था पहले की तरह नहीं हे नितीश उसे छिपाने मिडिया को नहीं धमका रहे हें यह सही नहीं हे की मिडिया इस वक्त सबसे अधिक गुलाम हे पूंजी पतिओं के यंहां नतमस्तिक हे नेता मिडिया में नोकरी दिलाने और मिडिया से लोंगो को बहार का रास्ता दिखने में सक्षम नहीं हे यदि काटजू ने नेताओं को अयना दिख दिया तो हंगामा होगया >>>>>>जय हिन्द
प्रजा तंत्र के चोथे स्तम्भ कहे जाने वाले प्रहरी को राज्य की सबसे बड़ी पंचायत में प्रवेश पर रोक लगा दी हे विधान सभा की कार्यवाही को अख़बार काली श्याही से दरसा रहा हे वह संकेत दे रहा हे की विधान सभा ने तानाशाही रवैया अपनाया हुआ हे जब प्रजा की सबसे बड़ी पञ्चाय ही तानाशाह हो जाये तो बाकी का क्या काली संपादकी का उपयोग तभी किया जाता हे जब लोकतंत्र की सभी मान्यताय समाप्त हो जाती हे मसलन प्रदेश में इमेजेंसी जेसे हालत हो या फिर तालिबानी हुकूमत में एसा होता हे की प्रहरी को पराधी में जाने की इज्जात नहीं हे कार्यपालिका ,विधायका न्यायलय का भी आदेश मानने तैयार नहीं हे अघोषित इमरजेंसी जेसा माहोल हे सब से शर्मनाक बात तो यह हे की मिडिया से जुड़े किसी भी सगठन ने इतने गंभीर मुद्दे को किसे भी मंच पर नहीं उठाया मिडिया मालिक और कर्मी भूल गए की एक यह तरह से उनको भी चेतावनी हे की हमारे तलवे चाटो नही तो हम अपनी ताकत के बल पर तलवे चटवा देंगे प्रदेश के मुखिया इस विभाग के मंत्री हें उनको भी यतो समझ नहीं हे या जानबूझ कर इएग्नोर कर रहे हे उनके अधिकारी जो हें उनको भी ज़ों नहीं रेग रही हे की यह क्या हो रहा हे>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> जय हिन्द
ReplyDeleteहरी अन्नंत हरी कथा अनन्ता >>>>>>>में कांग्रस के हरी की बात कर रहा हूँ आजकल वे छत्तीस गढ़ में कांग्रेस को लेकर नए- नए प्रयोग कर रहे हें हल ही में उन्होंने कहा हे की परिवर्तन यात्रा के मुखिया सर्फ और सर्फ पटेल और चौबे ही होंगे परवर्तन यात्रा से उनका मतलब प्रदेश में बीजेपी के सर्कस को बदलना और अपने सर्कस यानि कांग्रेस को स्थापित करना एक नेता के लिए यह सोच बिलकुल ठीक हे पर कुछ कंगेसिओं ने विरोध जताते हुए कहा की यह रमन की नहीं चौबे और पटेल के परिवर्तन की यात्रा हे ।हरि आने के ठीक एक दिन पहले चारण दास ने कहा की भईया जी जोगी जी और मोतीलाल जी बुजुर्गों की पहली लेन में हें। में चौबे और ,पटेल दूसरी पांति में हें उम्र के इस विवादित बयान पर हरी ने कोई सीधी प्रतिकिर्या नहीं की सीधी कायवाही कर संदेस दे दिया की आगामी विधान सभा चुनाव इनके मार्ग दर्शन में ही लड़ा जायेगा बाकि सब इन्हें सहयोग करेंगे कांग्रेस में इस तरह के फरमानों की चिंता नहीं की जाती मठाधीश कांग्रेसीयों को जबतक दस जनपथ एक और अब दो का फरमान नहीं मिलता ये मानते नहीं हें बड़ी विडंबना हे हरी की करें तो क्या करें एक
ReplyDeleteकांग्रेसी ने हरी को सलाह देदी की इस बार कांगेस की सरकार पक्की हे रमन का विरोध अन्दर ही अन्दर बढ़ रहा हे पार्टी और सगठन में अन्दुरुनी विरोध हे मोंका मत चूकिए इस समय बीजेपी अन्दर से जितनी कमजोर हे पहले कभी नहीं थी अब दल, चावल, चना , जूता चपल और साड़ी में अब वोट नहीं मिलने वाले वोटर परिवर्तन चाहता हे इनके और इनके दूर दराज तक फेले शासकीय रिश्तेदारों के चुंगल से जनता मुक्त होना चाहती हे
जय हिन्द >>>>>>
तीसरी पारी >>>डॉ रमन जी की पारी शुरू हो गई हे भर पुर उत्साह और उमग से शुरू हुई पारी 2014 कि तयारी हे 15 से अधिक विभागों को अपने कंधे में लादे मुख्यमंत्री विभागों में कसावट किसे लायेंगे ये बात अल्हदा पर एसा लग रहा हेव इस बार अधिकारिओं की खेर नहीं रमन की दूसरी पारी के आखरी दिनों में अधिकारी बेलगाम हो गये थे मंत्रीओं की सुनते ही नहीं थे रायपुर से लेकर दिल्ली तक यही चर्चा थी की सुशान के सबसे बडे रोड़े अधिकारी ही हें चुनाव के आते ही सरकारी घोड़े बे लगाम हो गए थे पोस्टल बेलेट से पता चला की कर्मी सरकार के कितने खिलाप हें जबकी रमन सरकार में सबसे मजे में यही वर्ग था अखंड भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारी और कर्मी इतने बेलगाम थे की वह खुले आम कहने लगे थे की सरकार चली जायेगी माहोल भी ख़राब कर रहे थे तीसरी पारी में सत्ता रूढ़ होते हे कर्मी सन्न रह गए हे एसा पहले बार हुआ हे की प्रशासनिक अधिकारिओं की भविष्य वाणी गलत साबित हुई हे यही प्रजातंत्र की कुंजी हे जिसने इनका घमंड चूर चूर किया हे अब देखने वाली बात यह हे की ये बेलगाम घोड़े किस तरह से कदम ताल करते हें >>>
ReplyDeleteबेलगाम घोड़ों की कदम ताल>>>>>>>तीसरी पारी >>>डॉ रमन जी की पारी शुरू हो गई हे भर पुर उत्साह और उमग से शुरू हुई पारी 2014 कि तयारी हे 15 से अधिक विभागों को अपने कंधे में लादे मुख्यमंत्री विभागों में कसावट किसे लायेंगे ये बात अल्हदा पर एसा लग रहा हेव इस बार अधिकारिओं की खेर नहीं रमन की दूसरी पारी के आखरी दिनों में अधिकारी बेलगाम हो गये थे मंत्रीओं की सुनते ही नहीं थे रायपुर से लेकर दिल्ली तक यही चर्चा थी की सुशान के सबसे बडे रोड़े अधिकारी ही हें चुनाव के आते ही सरकारी घोड़े बे लगाम हो गए थे पोस्टल बेलेट से पता चला की कर्मी सरकार के कितने खिलाप हें जबकी रमन सरकार में सबसे मजे में यही वर्ग था अखंड भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारी और कर्मी इतने बेलगाम थे की वह खुले आम कहने लगे थे की सरकार चली जायेगी माहोल भी ख़राब कर रहे थे तीसरी पारी में सत्ता रूढ़ होते हे कर्मी सन्न रह गए हे एसा पहले बार हुआ हे की प्रशासनिक अधिकारिओं की भविष्य वाणी गलत साबित हुई हे यही प्रजातंत्र की कुंजी हे जिसने इनका घमंड चूर चूर किया हे अब देखने वाली बात यह हे की ये बेलगाम घोड़े किस तरह से कदम ताल करते हें >>>
ReplyDeleteटोपी- टोपी पर लिखा हे पहनाने वालों का नाम गाँधी ने पूरे देश को टोपी पहनाई खुद नहीं पहनी . आर एस एस ने टोपी पहनी पर बीजीपी को नहीं पहनाई आन्ना की टोपी केजरीवाल ने छिनी जनता को पहना दी टोपी पहनने की एक कहावत बड़ी मशहुर हे कहावत हे की अरे आज फंला ने फंला को टोपी पहना दी, अरे वह टोपी बज टोपी पहनाने सर खोज रहा हे जरा बचकर रहना. अरे उस चीटर ने फंला व्यापारी को टोपी पहना दी, टोपी की खिल्ली कुछ इसी तरह से उड़ाई जाती रही हे टोपी कोई सोर्य का प्रतिक नहीं रहा हे कांग्रेसी खुद कहते हें की गाँधी ने कभी टोपी नहीं पहनी हमें पहनादी हमने पूरे देश को टोपी एसी पहनाई की पूरा देश ओचक रह गया आजकांग्रेस की टोपी देख का लोग भागने लगे हें केजरीवाल ने आन्ना की टोपी छीन का आब उसे पुरे देश को पहनने की योजना बनाई हे केजरीवाल की टोपी से प्रेरित हो कर बीजेपी ने भी केसरिया टोपी पहन ली हे इस टोपी पर मोदी पी एम लिखा हे टोपिओं का इतहास बड़ा पुराना हे टोपी पहनाने वाले और पहनने वाले आब नया इतहास लिखने जा रहे हें टोपी इतहास >>>> जय हिन्द
ReplyDeleteकेजरीवाल का वार
ReplyDeleteकांग्रेस की पीठ पर सवार हो कर केजरीवाल आब उनके ही सेनिकों पर वार कर रहे हें आपने सेनिकों पर हो रहे वार से कांग्रेस तिलमिला गई हे पिटती कांग्रेस को देख बीजेपी भी सकते में हे | बड़े बड़े आन्दोलन करने वाली बीजेपी ने भी कभी एसे आन्दोलन की कल्पना नहीं की थी | केजरीवाल के आन्दोलन को ले कर मिडिया जब भी बीजेपी से पूछ थी तो वो सिर्फ और सिर्फ यही कह पा रहे थे की यह सब अनार्की हे शासक को शोभा नहीं देता, वहीँ केजरीवाल का कहना हे की अनार्की कहने वालों को पता ही नहीं की जनांदोलन किसे कहते हें आब बंद एसी कमरों में बैठकर जन आन्दोलन नहीं चलाये जा सकते जब जनता सड़क पर हे तो सरकार को भी सडक पर ही आना होगा |कांग्रेस इल्जाम लगा रही हे की जनता से किये वादों को पूरा न कर पाने में नाकाम कजरीवाल जनता का ध्यान बाँटने नया और बेफजूल का मुद्दा लेकर राजनीती कर रहे हें |वो कितना भी नाटक करलें हम समर्थन वापिस नहीं लेंगे उन्हें दिल्ली की जनता को जो वादे किये हे वो आब पूरा करें या फिर जनता से माफ़ी मांगे और कहें हमने जो वादे किये थे वो झूठे थे हमने लाफाजी थी |
आज जन आन्दोलन खड़ा करने की दम या तो मोदी में हे या फिर केजरीवाल में मोदी का जन आन्दोलन सलीके से और केजरीवाल का उग्रता से भरा होता हे |आज दो तरह के आन्दोलन चल रहे हें सकारात्मक और नकारात्मक जो जनता कांग्रस और बीजेपी से खपा हे वो केजरीवाल की और हे और जो कांग्रेस के कुशासन और केजरीवाल की उग्रता से परेशान हे उनकी पसंद मोदी हें कांग्रेस को केजरीवाल से डर नहीं हे उसे तो उसने ख़तम सा ही कर दिया हे केजरीवाल दिल्ली में ही उलझ कर रह गए हें मोदी को पूरा मोका हे मैदान में अकेले खेलने का | कांग्रेस और केजरीवाल आपस में ही उलझ गए हे केजरीवाल की छोटी से मांग थी की उन पुलिस वालों पर कार्यवाही हो जो इस तरह के अपराधों को अपना कमाने का जरिया बनाये हें बात साफ हे जो दिल्ली को जानते हें उन्हें पता हे की इस तरह के अपराध से वह इलाका मशहूर हे वंहा से पुलिस को मोटी कमाई के साथ साथ उच्च वर्ग के लिए मन पसंद सेवा भी उपलब्ध हे वो बात अलेहदा हे की केजरीवाल को मुख्यमंत्री रहते हुए अपने प्रोटोकॉल कल का उपयोग करना था थोडा धर्य से कम लेना था पर मामला तो ठीक उठाया उसका तरीका हमारी संस्कृति के खिलाफ हे >>>>>>>>>>>>>> जय छत्तीसगढ़
जबलपुर की एक प्रेस वार्ता में जगत गुरु शंकराचार्य ने पत्रकार को थप्पड़ जड़ दिया जगतगुरु से पत्रकार ने मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर प्रश्न पूछा था गुरुदेव ने उत्तर में थप्पड़ जड़ दिया कमरा ऑन था सो गुरु का थप्पड़ रिकार्ड हो गया थप्पड़ पड़ते ही प्रेस वार्ता में अफरा तफरी का माहोल बन गया राष्ट्रिय मिडिया ने जब इस बात को जगत गुरु से पूछा तो उन्होंने थप्पड़ मरने की पुष्टि कर दी और कहा की ये मिडिया वाले इसी तरह उस बन्दर को प्रधानमंत्री बनाने में तुले हें में राजनेतिक साधू नहीं हूँ मुझसे एसे प्रश्न नहीं पूछना चाहिए >>> जय छतीस गढ़
ReplyDeleteजीरो टारलेंस की बात जोर -शोर से डा रमन सिंह जी ने उठाई हे, जनता जानना चाहती हे की इस जीरो टारलेंस की परिधि में आई. ए.एस >आई. पी. एस >आई. फ. एस > मंत्री ,सन्तरी,[उनके पिए ] उनके चमचे और सत्ताधारी विधायक , आते हें या नहीं क्यों की अफसर को फ़ाइल् गोल गोल घुमाने में इनकी मास्टरी होती हे| जब बार बार फ़ाइल् घुमती हे तो मज़बूरी में पीड़ित को शिष्टाचार निभाना ही पड़ता हे इसको केसे चेक करेंगे और क्या यह शिष्टाचार जीरो टारलेंस की परिधि के बाहर हे इस पर केसे नियंत्रण करेगे येही असली जड़ हे | गुड गवर्नेस न होने से शिष्टाचार- भ्रष्टाचार से कंही ऊपर हो गया हे इसे केसे कंट्रोल करेंगे>>>>> जय छत्तीसगढ़
ReplyDeleteनक्सली >>बेहेस >>विधान सभा में स्थगन प्रस्ताव के दोरान नक्सली मुद्दे पर जोर शोर से बेहेस हुई सत्ता पक्ष ने कहा की हमारी सरकार ने नक्सलीओं पर नकेल डाली हे हम लगातार उनपर दबाव बना रहे हें विपक्ष ने कहा की आप झूठ बोल रहे हो आपके शासन कल में नक्सलीओं ने विकराल रूप धारण किया हे नक्सली राजधानी में व्ही व्ही आई पी इलाके में घूम रहे हें छत्तीसगढ़ क्लब में बेठ कर आप को चुनोती दे रहे हें आपके शासन कल में इतनी घटनाएँ हुई हे जो पूरे भारत में नहीं हुई तमाम आंकड़े दिए गए भाषण बहुत ही जोरदार हुआ पर किसे भी विद्वान् ने इस पर कोई चर्चा नहीं की इस समस्या को केसे निपटाया जाये सत्ता कहती रही की यह देश की समस्या हे विपक्ष कहता रहा की यह आपके शासन कल की समस्या हे |
ReplyDeleteइस पूरी बहस में मुझे एसा लगा की नक्सलीओं का गुण गन ही किया जाता रहा की वो हम से कितने ताकत वर हें उनका नेटवर्क हम से कितना मजबूत हे उनसे हम हर मोड़ पर पीछे हें और हम उनसे कितने मजबूर हें | शासन के पास तमाम फ़ोर्स हे हथियार हें क़ानूनी ताकत हे फिर भी मुठी भर आतंकी हमें चमका रहे हें सिर्फ चमका ही नहीं रहे हें नुकसान भी पंहुचा रहे हें हम इतने पंगु क्यों हें इस पर किसी ने कोई चर्चा नहीं की ना ही कोई सुझव दिए सिर्फ और सिर्फ नक्सलीओं की ताकत का बखान ही होता रहा एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगते रहे और अपनी अपनी पीठ थपथपाई और सभा समाप्त>>> जय हिन्द >> जय छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ विधान सभा >>>>> सन दो हजार में छत्तीसगढ़ का गठन हुआ बटवारे में 90 विधायक मिले और मिला उनको विधान सभा में बेठने के आसन उन असनो में सब से महत्वपूर्ण हे अध्यक्ष की आसंदी इस आसंदी का बड़ा इतहास हे सी पी एम बरार के समय जो विधान सभा थी उस वक्त विधानसभा अध्यक्ष इसी आसंदी पर विराजमान हुआ करते थे राज्यों का पुनर्गठन हुआ मध्यप्रदेश बना तो यह आसंदी नागपुर से प्रदेश की राजधानी भोपाल ली गई 1956 से यह आसंदी मध्यप्रदेश केव विधान सभा अध्यक्ष की आसंदी थी चार बार की विधान सभा का संचालन इसी आसंदी से हुआ बाद में नए फर्नीचर की आपूर्ति के साथ इस एतहासिक आसंदी को आराम करने का मोका मिला सत्र चलते रहे बाजपेई जी की सरकार ने एक बार फिर से राज्यों का पुर्नगठन किया छत्तीसगढ़ का जन्म हुआ और बटवारे में यह आसंदी छत्तीसगढ़ के हिस्से आई |
ReplyDeleteइस एतहासिक आसंदी की एक और खूबी हे तमाम राज्यों को विधान सभा अध्यक्ष की आसंदी के उपरी हिस्से में वंहा की विधान सभा का मोनो चिन्हित होता हे इस आसंदी में एसा कुछ भी नहीं हे इसके अलावा या आसंदी रोजवुड से बनी हे गुलाब की लकड़ी से बनी इस आसंदी की अहमियत अपने आप में हे की गुलाब के फूलों की तो तारीफ सुनी थी जानी थी पर उसकी लकड़ी की आसंदी दुर्लभ ही हो सकती हे |
इस आसंदी में छत्तीसगढ़ विधान के प्रथम स्पीकर राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल विराज मन हुए उनके बाद प्रेमप्रकाश पण्डे फिर धर्म लाल कोशिक और आब वतमान में गोरीशंकर अग्रवाल जी उस एतहासक आसंदी पर विराजमान हो कर विधानसभा संचालित कर रहे हें |
रोजवुड से बनी हे विधान सभा की आसंदी