Friday, 30 September 2011

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1 comment:

  1. सोनिया जी के दो रत्नों ने मिलकर कहा हम एक हें | दादा > जो नोटसीट पी म ओ को भेजी उसमे मिरी सहमती नहीं थी अधिकारीयों का मानना था कि
    २जी कि नीलामी होना चाहिए इस बयान से दादा क्या सन्देश देना चाहते हें देश को चूना लगे . तो लगता रहे ये केसे वित्तमंत्री हें इनकी की इसी सोच से तो महगाई पर काबू नहीं हो पा रहा
    २जी कि आंच से जीजाजी का घर बचा रहे इसलिए संकट मोचन कहे जाने वाले काग्रेसी
    हनुमान ने जो आग अपनी पूछ में खुद लगाई थी उसे सोनिया के अंशु से बझा दी
    वाह क्या बात हे| दादा भूल गए की दस्तावेज तो तैयार हो गयाहे चाहे इनकी सहमते रही हो
    या ना रही हो

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