Tuesday, 30 October 2012

 य़ू पी ए  की जिस नाव  में  पांच लाख करोड़  छेद  हों उस नाव के खिवैया हें  राहुल भैया  मनमोहन जी  को जो नाव सोनिया जी ने सोंपी थी उसमे आठ  वर्षों में करीब  पाच लाख करोड़ के घपलों के एसे छेद  हे जिन्हें भरना राहुल के  बूते का  नहीं हे इस डूबती नैया के खिवैया राहुल बन तो गए हें उन्होंने कुछ बड़े छेदों को भरने की कोशिस भी की हे नाव में कुछ बड़े पम्प भी लगाये हे जिनके दुवारा भ्रष्टाचारी कीचड़  फेकने की कोशिस की जाएगी पर क्या कॉमन वेल्थ का बड़ा छेद , टू जी का छेद , ,कोलगेट का छेद ,और सबसे बड़ा पंचर  जो रबाट ने किया  हे  उसको केसे जनता के मानस पटल से अलग कर पाएंगे 
दस बारह नए मझिओं को लेकर नाव सुधरने का ठेका  तो उन्होंने लेलिया हे पर कप्तान तो अभीभी वाही पुराना ही हे  जिसे न तो चलने का ज्ञान हे ना हीं सुधार ने का देश और विदेशों में मनमोहन जी की जो छवि हे वह किसे से छुपी नहीं हे जीवन में उन्होंने कभी चुनाव लड़ा नहीं जनता की नवस वो जानते नहीं लोकतंत्र के अर्थशास्त्र का ज्ञान ही  नही हे  उनकी अर्थ नीतिओं से सर्फ और सर्फ चंद  लोगों को ही फायदा मिला हे उनके अर्थतंत्र से आम जनता में तरही ही  मची  हुई  हे जिन्हें फायदा मिला हे वो हें उद्योग पति ,जमाखोर ,कालाबाजारी, नोकरशाह, नेता मंत्री और उनके रिश्तेदारों ने जो लुट मचाई हे वह तो एताहासिक जिसे जंहा जगह मिली वहीँ मुह् मारा चाहे वाड्रा  हों याफिर खुर्सिद या रजा हों या कलमाड़ी कोलगेट में तो खुद मनमोहन जी भी पीछे नहीं रहे जिंदल हों संचेती सभी ने भ्रष्टाचार की बहती जमुना में हाथ ही नहीं पूरा स्नान किया हे  
नवंबर में राहुल कांग्रेस के दुसरे बड़े नेता होंगे बांहे चढ़ा  कर जब वो भाषण देंगे तो कोल गेट पर क्या कहेंगे मनमोहन तो गयो अब हमारी  बारी हे राबर्ट को माफ़ करो देश के बहनोई हें हम आम आदमी की बात करते हें जनता पूछेगी की किस आम आदमी की बात करते हें  जिसके पास  चूल्हा जलने केलिए गेस नहीं, गाड़ी चलने के लिए डीजल पेट्रोल नहीं , बजली का बिल भरने की ताकत नहीं किस विकास की बात करते  हें और किसके विकास की जिंदल के  विकास की अंबानी के विकास की या नेता और उनके रिश्तेदारों के विकास की विकास की यह परिभाषा अब शायद  जनता समझ गई हे राहुल जी बड़ी कठिन डगर हे इस पनघट की>>>>>>>>> जय हिन्द 

Sunday, 16 September 2012


करोड़ों दिलों में राज करने वाले मरते नहीं अमर हो जातें हें एसे ही व्यतित्व के धनी थे सुदर्शन जी जिस गणवेश को उन्होंने नो वरस कि उम्र में धारण किया उसी गणवेश में मोक्ष को प्राप्त हुए कितना लगाव था उन्हें पाने करनी पर हिन्दत्व की पूजा करते हुए पूरा जीवन अखंड हिंदुत्व की परिकल्पना में बिता दिया हिंदुत्व की जो परिभाषा उन्होंने दी हे वह अधभुत हे सभी धर्मो को सामान आदर ओर मर्यादित रह कर ही समवृधि कि कल्पना थी उनकी संघ के वो एसे इकलोते नेता थे जो दूसरे समाजों में भी सम्मानीय रहे हें उन्होंने संघ की विचारधारा के कट्टर विरोधिओं को भी यह बतला दिया था की मेरे हिंदुत्व को लेकर भ्रम ना पालें सर्व समाज का हिदुत्व हे मेरा हम जिस भूमि में जन्मे हें उसकी पूजा करना उस भूमि में रहने वालों के सम्मान के लिए मर मिटना वहां की तरक्की खुशाली के लिए सदा खुले मान से तैयार रहना यही सही हिंदुत्व हे भारत का इसी हिंदुत्व कि लेकर सुदर्शन जी ने अपनी अंतिम साँस रायपुर में ली वो महान आत्मा ही थी जो इसे भूमि में पैदा हुई ओर इसे भूमि में अंतिम साँस ली विरलों के साथ एसा होता हे जो जागते हुए अपनी मोंत का स्वागत करते हें एसे युग पुरुष मरते नहीं अमर हो जाते हें उनकी हिंदुत्व की विचारधारा आज नहीं तो कल इस हिदुस्तान को अपनाना पड़ेगी नहीं तो हमारा समाज आज जिस दिशा हीनता की ओर जा रहा हे उसमे घ्रणा के अलावा कुछ नहीं हे हिंदुत्व इस की इजाजत कभी नहीं देता अमर सपूत को सत सत नमन >>>> जय हिंद
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Friday, 8 June 2012

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'via Blog this'छोटा मुह ओर बड़ी बात >>>>>>संजय जोशी का एक  जमाना था जब उन्होंने अडवानी जी से इस्तीफा माग लिया था संघ के मुखोटे के रूप में बीजेपी  पर जोशी  हाबी थे अडवानी जी  के सामने जोशी एक अदना से नेता थे लेकिन संघ के आशीर्वाद से उनकी हिम्मत की दाद दी जाती  थी की उनके जेसा निष्ठावान> होशियार> दबंग >दिलदार  हीरो कोई नहीं हे उस वक्त के संघ प्रमुख सुदर्शन जी भी अडवानी जी से इस्तीफा नहीं मांग पा रहे थे तब इस्तीफा मागने का दुशाहस  जोशी जी ने किया था बीजीपी के लिए जोशी का यह   कदम आत्महत्या से काम नहीं था उस गलती का खामियाजा  बीजेपी आज तक   भुगत रही हे मुस्लिम वोटरों  में सेंध लगाने का अच्छा मोका था अडवाणी जी ने जिन्ना का मुखोटा उस वक्त पहना था जब चुनाव सिर पर थे| जोशी जी दो ही मामले में पूरे देश में जाने जाते हें एक अडवाणी जी का इस्तीफा  मागने का दुशाहस  ओर उनका  सी ड़ी कांड जिससे वो हल ही में बरी हुए थे | 
छोटा मुह ओर बड़ी बात उसवक्त भी हुई थी  जब जोशी ने अडवाणी जी से इस्तीफा मांग लिया हे आज कि घटना भी कुछ इसी तरह की हे केडर बेस  संघ में  जोशी के सामने गडकरी कुछ भी नहीं  हे पर फिरभी सहस दिखाते हुए इस्तीफा मंजूर कर लिया>>> वक्त ने एसी करवट बदली हे  की आज  जोशी जी  बीजेपी के  अतीत  का हिस्सा  बन गए |

Monday, 23 April 2012

Gmail - अपहरण का अनंत - achoubey242@gmail.com

Gmail - अपहरण का अनंत - achoubey242@gmail.com:

'via Blog this'अपहरण का अनंत >>>>>>>>>>>>>>>सुरक्षा  कि खामियों के चलते मेनन का अपहरण हुआ इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता घोर नक्सली इलाके में सर्फ दो गार्डों के भरोसे सभा?कलेक्टर ने अपनी जन तो जोखिम में डाली ही थी  सभा में आये किसानो को भी मुस्किल में डाला दिया  था मेमन कि लापरवाही ने अब सरकार कोभी चिंता में डाल दिया हे नक्सलीओं ने कहा हे की आठ दबंग किस्म के नक्सलीओं  को  छोड़ा जाय  अपहरण का तो  अंजाम  यही होना था सरकार पर  दबाब बना हे की जरी  सूची के मुजरिमों को  रिहा करो उन नक्सलीओं को जिनको पकड़ने में सरकार के  हाथ पैर फुल गया थे बड़ा ही सरल ओर  उत्तम  किस्म का खेल हे ये अपहरण| भगवन ना करे  यदि  एसी परंपरा चली तो कसब को अफजल  को ओर ना जाने  कितने देश के दुश्मनों को छोड़ना पड़ सकता हे ?
बेस ने कहा हे की पुलिश  अफसर अपनी गुट बजी में मस्त रहते हें एसी में बैठ कर सिवाय एक दुसरे कि टांग खीचने के अलावा कुछ नहीं करते शर्मनाक बात हे की  सरकार का इतना महत्वपूर्ण कार्य क्रम  ग्राम स्वराज  चल रहा हे जिसकी तैयारियां माह भर   से चल रहीं हें  ओर उसकी सुरक्षा इतनी लचर नक्सली  इनका लंगोट उतारकर लगाये इनको पता ही नहीं चला चोबीस घंटे  बीत गए हें सरकार  ये पता नहीं लगा पा रही  हें कि मेनन कहाँ हे किस हाल  में हे सरकार के पास  बीसों बटालियन ओर हजारों पुलिस वाले  एक  कलेक्टर का पता लगाने में नाकाम हें ?
प्रदेश के एक अख़बार ने लिखा हे की नक्सलीओं ने अपनी रणनीति बदल दी हे  नक्सली अब माओवादी नहीं रहे नक्सली कांग्रेसी हो गए हें तुरत टिपणी का क्या आशय हे ये पता नहीं पर जिस तरह कांग्रेसी नेता चाहे जोगी हों या हरी प्रसाद वे भाजपा को ही इस मामले में दोषी  बता रहे हें इस तरह से  टिपणी महत्व पूर्ण हे |
मेरा मानना हे कि जब तक इनको इनके घर में  घुस कर नहीं मारोगे  तबतक ये एसे ही डारावते   रहंगे ओर आम जनता में दहशत  फेलाते रहेंगे इस मारा मरी में  दोचार निर्दोस भी मरे जाते हे तो कोई प्रवाह नहीं इनको पकड़कर पालने  को जरुरत नहीं हे मोत का  भय  जब तक इनको नहीं होगा ये हमारे लचर कानून का फायदा उठाते रहेंगे ओर अपहरण कर मुजरिमों को छुड्वाते रहेंगे मेरा मानना हे ही मुजरिमों को ना छोड़ कर इन्हें घेर कर मरना चाहिए अपनी ताकत का अंदाजा इन्हें करवाना चाहिए इन्हें मजबूर करा देना चाहिए कि मेनन को बिना नुकसान पंहुचाये छोड़ें नहीं तो वो दिन दूर नहीं कि जब वो  गृह मंत्री को अगुवा करलें ओर मांग रखें कि हमको मुख्य मंत्री बनाओ >>>>> जय हिंद

Wednesday, 11 April 2012

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संचेती का सच >>>>>>संचेती ने नदगांव की ओर से प्रवेश किया नदगांव   ओर भटगाव की यात्रा संचेती बंधुओं ने  छत्तीसगढ़ में की करीब दो सो किलोमीटर की इस व्यापारिक  यात्रा में संचेती ने छत्तीसगढ़ सरकार को करीब दो हजार पांचसो  करोड़ का चुना लगाया ओर खनिज मिगम के सहारे सरकार को   कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया हे | रवि शंकर जी कहते हें की व्यापारिक सांसद को व्यापर  करने का मोलोक हक़ प्राप्त हे बशर्त पूरे प्रकरण में पारदर्शिता हो  |पारदर्शिता कि शर्त सरकार को पूरी करना हे मेरा मानना हे   कि सरकार ने गलती नहीं कि होगी  | महालेखाधिकार की रपट में कहा गया हे की  केन्द्रिय जोलालिकल ने कहा हे की दोनों खदानों का कोयला  उच्य श्रेणी का हे संचेती ने भी प्रयावार्ण मंजूरी लेते समय कहा हे कि पछ्पन प्रतिसत  कोयला   उच्य श्रेणी का हे लिकिन खनिज निगम  ने कहा हे कोयला निम्म  श्रेणी का हे ओर नेविदा  का प्रकाशन  कर दिया भटगावों का आधा  हिस्सा ओपन खनन का हे ओर आधा अंडरग्राउंड  खनन का हे  दोनों मामलों में दूरी इतने काम हे कि कोयेले कि क्वालटी में कोई अंतर नहीं हे पर दोनों के दोहन में अंतर हे एक की मैनिंग काष्ट अधिक हे दुसरे की काम इसलिय भी भूगर्भविभाग ने इस ब्लाक को दो भागों में बांटा हे लगत का मूल्य पर  भारी  असर होता हे अंडरग्राउंड खनन महंगा तो हे इसलिए इस ब्लाक के मूल्य निर्धारण में प्रक्रया अलग होना थी  खनिज नेगम महालिखाधिकार के सामने एसे दस्तावेज नहीं देपाया जिस से काम दरों कि प्रमाणिकता पर  सहमती बन सके  महालिखाधिकार ने घटे की आयु बत्तीस वर्ष राखी हे इस अनुमान से प्रति वर्ष निगम को बत्तीस करोड़ कि हानि होगी बत्तीस वर्ष पर बत्तीस करोड़ का आंकड़ा निगम को भरी पड़ा हे   >>> आगे ......
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Monday, 2 April 2012

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Gmail - निशा घाटी का नशा > - achoubey242@gmail.com

Gmail - निशा घाटी का नशा > - achoubey242@gmail.com:
निशा घाटी  का नशा >>>>>रायपुर से 180 km दूर उड़ीसा की सीमा से लगी निशा घाटी ने हमें मदहोस करदिया  महुआ के पेड़ों से भरी घाटी में हम जब पंहुचे तो महुए के फूलों की महक से घाटी सराबोर थी मदहोस कर देने वाली खुशबु  ने हमारी थकन को तो दूर कर ही दिया कला चाँद बेगा ने हमारा स्वागत किया घनघोर जंगल  में ऊँची पहाड़ी से गिरते झरने के किनारे बांस ओर पत्तों की इस झोपडी में बैठ कर हम बेगा से निशा घटी कि जानकारी ले ही रहे थे कि बेगा की पत्नी ने भुने हुए महुआ फूलों के साथ महुए के रस को दोना में हमारे सामने परोस दिया उसने अपने भाषा  में जो के उड़िया में बोल रही थी आगाह किया कि हम उसकी बोली तो नहीं समझ रहे रहे थे पर उसके हाव  भाव  से लगा रहा था की जो कुछ हे ग्रहण करें मेने जीवन में पहली बार भुने हुए महुओं के फूलों  का स्वाद लिया रस पीने  में पहले तो काफी कठनाई हुई पर थोड़ी देर में सब सामान्य हो गया टूटी फूटी हिंदी ओर उनके हाव भाव से हम ने बातचीत का सिलसिला जरी रखा महुआ रस का आन्नद जब धीरे से अपने शबाब  पर पंहुचा तो हम घटी के झरने का आनन्द लेने उसके गर्भ ग्रह में पहुचे एक घंटे  ही बीते होंगे आन्नद लेते हुए  करीब दो बजे थे की दूर से  नगाड़ों की आवाज ओर जंगली पक्षियों के शोर  ने  हमारे आनन्द में खलल डाली तभी  कला चाँद भागता हुआ हमारी ओर आया ओर तुरत झरने  से बहार निकलने  ने को कहा हम कुछ समझ पाते  अन्न फानन में झरने के बहार निकले ओर करीब भागते हुए उसकी झोपड़े के पास आकार रुके ही थे की उस  झरने के पास बीस से भी अधिक भालुओं का एक झुण्ड झरने के अस पस हमारे छोड़े हुए सामान जिसमे मिनरल वाटर बिस्कुट नमकीन के पेकिट सिगरेट से भरे पिलास्तिक के थेलों की चिर फाड़  करने में जुटे भालुओं को हम  देख रहे थे भालुओं की इस टोली को देख जहा  हमारी सांसे फूली हुई थी वहीँ हमारी रक्षा  के लिए बेगा अपनी तईयारी  में लगा हुआ  था  उसने हम  सभी को लकड़ी मसलें थमा दी जो उस वक्त जली नहीं थी कला चाँद ने  कहा की अब यहाँ ठहरना  ठीक नहीं ये भालू  जल्दी से भागने वाले नहीं हें झोपडी से दूर पहाड़ी की दालान पर हमारी गाड़िया खाड़ी थीं सो हम बिना जली मसलों के साथ दहलन की ओर चल दिए इस भागम भाग में हमारे मित्र का मोबाईल वहीँ झरने के पास छुट गया था चलते चलते मेने उसके मोबाईल पर डायल किया घंटी बजी हमने दूर से पलट कर देखा तो हमें लगा की भालू अचानक जिस तरफ से आये थे उसी दिशा  में भाग रहे हें इस भागते  हुए नज़ारे को देख  कर हम ठहर गए घंटी  का जाना बंद हुआ मेने फिर से डायल किया घंटी पुनः  जा रही थी  हमें भालू भागते  नजर आ रहे थे बड़ा ही अजीब माहोल था हमने मित्र  से पूछा की कोन सी  टोन हे जो भालुओं को डरा रही हे  अब हिम्मत हो तो जाओ ओर मोबाईल उठा लाओ मोबाईल का लालच भी था बेगा को तैयार किया कि इसे कुछ पेसे का लालच दो तो शयद बात बने पर हमने  ध्यान से दिखा भालू जादा दूर नहीं भागे थे सो मोबाईल की बलि चढाई ओर वापिस सोहिला पंहुचे 
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Saturday, 31 March 2012

तेल कम्पनियां >>>>>>>>>>>>>>>>.घटा फिर घटा ये एसी कहानी हे की इससे निजात पाने के लिए कम्पनियों को अपने गरेबान में भी झांक कर देखना चाहिए की उनका स्टेब्लेशमेंट का खर्च क्या हे उनके टीए डीए इस वक्त कहाँ जा रहे हें फ्जुली खर्च का ग्राफ कहाँ जा रहा हे तेल के सोदे दो तरह के होते हें एक लम्बी डील रेट  के ओर एक तत्काल रेट के इन तेल कम्पनियों ने कभी अपने खर्चे पर लगाम लगाई सुना नहीं इन ने धंधा बनालिया हे की बेरल के रेट बढे नहीं की   रोना शुरु कर दिया उसपर सोनिया सरकार नमक छेडाकने का काम सबसे पहले करती हे तेल कम्पनिया हमारे बस में नहीं तो तुम्हरे बसमे सिर्फ भ्रस्ताचार हे 2G एक लाख सत्त्र्हजर करोड़ का घपला  भारत की जनसँख्या एक सो बीस करोड़ सिर्फ इसी  घुटाले को लें तो प्रति व्यक्ति चोदाह सो करोड़ बेठता हे ये घुटाले बाजों से पेसे बसुलो ओर जनता को रहत दो गोरी चमड़ी को क्या फर्क पड़ता हे वह तो इस्ट इंडिया की तरह काम कर रही हे उसके बल गोपाल मजे में हें नेहरु से लेकर सोनिया तक सभी घुटाले में सरिक हें इनके डी एने  ये में घुटालों के जींस हें उस पर वह बंगाली जो अपने आखरी पाली खेल रहा उसके बस में सिर्फ ओर सिर्फ बयान देना हे टेक्स स्तेक्चार पर कोई बात नहीं करता तेल आर इतना टेक्स हे उसे काम नहीं करता उस पर वह   सरदार उसने जीवन में कभी नहीं सोचा होगा कि वह कभी इतनी ऊँची कुर्सी पर बैठ पायेगा अकाल से पैदल सरदार अपने आपको वितत्य का जानकर कहता हे एसा जानकर जो घुटालों  के रिकार्ड बना रहा हे सत्ता धारीओं को लुटने की खुली छुट दे राखी हो अकाल से पैदल सरदार ने देश को बर्बाद कर दिया हे  ओर बेशमो की भांति कुर्सी पर बेठा हे>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>  जय हिंद 

Monday, 26 March 2012

(33) Facebook

(33) Facebook:डरपोक सेना प्रमुख >>>>>.सेना प्रमुख  ने कहा हे की सेना में भ्रष्टाचार केंसर कि तरह फेल गया हे इसकी पुष्टि करने के लिए उन्होंने उदाहरण के तोर पर कहा कि मुझे भी चोदाह करोड़ की घुस देने के लिए आफर था जिसे मेने मंत्री जी को बताया मामला तजा नहीं पुराना हे पुराने मामले को उजागर कर सेना प्रमुख ने मंत्री जो को संदेह के घेरे  में ला दिया हे उनका यह कहना कि  मेने तो मंत्री को बतला दिया था अब मंत्री जाने ओर घुस देने वाला जाने ये बयान देश के प्रमुख सेना पति का हे जिसके ऊपर देश कि सुरक्षा का भार हे इसमें संदेह नहीं कि उनने भष्टाचार के केंसर को उजागर करने के लिए इस तरह का बयान दिया हे पर प्रश्न यह भी हे की इसतरह के दलाल को उन्होंने उसी वक्त हिरासत में क्यों नहीं लिया मंत्री को सूचित कर क्या वह उनकी सहमती जानना कहते थे कि  घुस लूँ या ना लूँ कियोंकि दोनों ने उस मामले में अभी तक चुप्पी साध राखी थी अचानक जब उनकी जन्म तिथि का गरमाया ओर अन्थोनी ने उनका साथ नहीं दिया तो उन्होंने इस मामले में मंत्री को भी घसीट लिया ओर पूरे देश में यह सन्देश देदिया कि मंत्री जी चुप थे मतलब  देश के दो प्रमुख उस बिचोलिये पर कोई कार्यवाही नहीं कर सके या करना नहीं चाहते थे इस मामले में दोनों डाक्टर -डाक्टर खेल रहे थे जबकि दोनों सक्षम थे कार्यवाही करने के लिए फिरभी कार्यवाही नहीं की अब जब मामला आम होगया तो मंत्री ने मामले को सी बी ई को देदिया हे इस तरह के चालचलन से मंत्री तो  दोसी   हें पर उनसे बड़ा दोषी  तो खुद सेना प्रमुख हे जिसने जल में आये शिकार को जाने दिया मुझे तो लगता हे कि सेना प्रमुख ने जो बयान अभी दिया हे उससे तो लगता हे की वे मंत्री से बदला ले रहे यह तो यही बात हुई की यदि सामने वाले कि दोनों आंखे फूट  रही  हें तो वो अपने भी एक आंख फुड्वाने तैयार हें इस मामले में दोनों दोषी हें >>>>>>>>>>>>>>> जय हिद 

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Saturday, 24 March 2012

सदन की गरिमा .>>>>>> सरकार सदन  के प्रति जबाब देह हे पर  आज का  विपक्ष सिर्फ टाइम पास करता हे   ना तो सदन में  मुदों पर चर्चा  होती ना सरकार की जनहित में खिचाई वंहा तो  एक दूसरे की व्यतिगत छवि बिगड़ने के आलावा सदन में ओर कुछ नहीं होता विपक्ष सिर्फ पर सिर्फ इसलिए सदन जाता हे की वह खबरों में केसे आये जनहित के मुदों पर भी  विपक्ष जबरन टोकाटाकी कर महत्वपूर्ण विषय पर भी अपनी हीन भावना को ही  उजागर करता हे मसलन यदि सदन में नक्सल समस्या पर चर्चा हो रही हे तो उसमे भी वह सर्फ ओर सर्फ कटाक्ष ही करता हे विपक्ष उसे राज्य की समस्या नहीं मानता वह इसमे लगा रहता हे की यह समस्या आपके कार्यकाल की हे  आप जाने हम तो सिर्फ नमक छिड़कने का ही काम करेंगे इस सोच  की भावना से सदन में बेठे हमारे ही प्रतिनिधि अपनी हार का बदला चुकाते रहते हे जबकी वोटर ने वोट देते समय यह नहीं सोचा था की सदन में जाकर यह प्रतिनिधि राज्य की समस्या को बदले के चश्मे से देखेगा सदन में बैठकर राज्य हित की समस्याओं को एक साथ मिलकर दूर करें ओर जनता को राहत दें एसा आज के जन प्रतिनिधि सोचते ही नहीं हें वह तो अपनी हार का बदला या फ्रास्तेसन से प्रेरित होकर सदन का समय ओर  पैसा बर्बाद करते रहते हें विकास की जुमेदार सरकार की कानून सरकार जाने हम तो सिर्फ  ओर सिर्फ ऊँगली ही करेंगे जनता ने तुम्हे वोट दिया हे तो जबदारी भी दी हे चाहे  सरकार किसे कि हो जनता तो तुम्हारी हे >>>>>>>>>>>>>>>>>> जय हिंद 

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