Gmail - दिन जो पखेरू होते, पिंजरे में ,में रख लेता पलता उनको जतन से मोती के दाने देता सीने से रहता लगाये - achoubey242@gmail.com:
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Saturday, 31 December 2011
Friday, 30 December 2011
Thursday, 29 December 2011
Wednesday, 28 December 2011
Monday, 26 December 2011
Friday, 23 December 2011
Friday, 9 December 2011
Saturday, 3 December 2011
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सोडी को पत्थर से डार लगता हे
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सोनी सोडी पहले भले ही कम अकाल होने से नक्सलियों के जल में फंस गई हो पर अब वह शहरी नेटवर्क की एक महत्व पूर्ण कड़ी हे और सतिर भी हे उसने पुलिश पर जो आरोप लगाये हे वो काफी संगीन हें उसने कहा हे की उसके साथ बतमीजी हुई हे डाक्टरों की परीक्षण रिपोर्ट में भी कहा गया हे की पत्थर पाए गए हें इतनी सुरक्षित जगह पत्थर केसे पंहुचे यह जाँच का विषय हे सोडी ने कहा हे की हमारा जेल रायपुर कर दो हमें पत्थर से डार लगता हे बड़ी अजीब शिकायत हे कोर्ट को भी लगा की फिरसे पत्थर का उपयोग ना हो सो आदेश कर दिया की जेल बदल दो मेरा मानना हे की कोई भी महिला अपराधी जाँच कर्ताओं पर यह इल्जाम आसानी से लगा सकती हे सोडी गंभीर आरोपों में घिरी हेउसकी सामाजिक प्रतिस्था तो ख़त्म हो ही गई हे अब क्या बचा हे वहां पत्थर पंहुचे या कुछ ओर क्या फर्क पड़ता सोडी को सो अपराधिक महिला इस तरह के बेबुनिया इल्जाम लगा कर सिम्पेथी हासिल करना चाहती हे ओर अधिकांश मामलों में वे इस तरह के हथकंडे अपना कर सिम्पेथी हासिल कर लेतीं हें |
पुलिश की छवि इस तरह मामलो में पहले से काफी सुधर पर हे पुलिश को मालूम हे की इस हरकत के परिणाम घातक होते हें अब इसतरह से प्रताड़ित करना संभव नहीं हे फिर भी यदि किसी ने यह दुस्साहस किया हे तो उसे कठोर सजा मिलना ही चाहिए हमारी संस्कृति कहती हे नारी का सम्मान हो चाहे वो अपराधी ही क्यों ना हो उसे इस तरह जलील नहीं किया जा सकता ... जय हिंद
Monday, 28 November 2011
Sunday, 27 November 2011
Saturday, 26 November 2011
Friday, 25 November 2011
Thursday, 24 November 2011
सोच की लकीरों के बादशाह का अंत
सोच की लकीरों के बादशाह का अंत >>>>>>>>>>>>रजनीश को जीवन समर्पित करने वाले ओशो के भक्त विष्णु सिन्हा ने मुम्बई में जीवन की अंतिम सांसे ली बहुत ही दुखद समाचार था पर इश्वर के आगे किसे कि नहीं चलती विष्णु जी कह करते थे की अल्लू सांसे ते हें ना एक उपर ना एक नीचे मेने अपने जीवन के बहुमूल्य पन्दरह वर्ष उनके सानिध्य में गुजारे में दावे के साथ कह सकता हूँ की मालिक की भूमिका में इतना दबंग संपादक नही देखा ना ही कोई मिशल सुनी विष्णु जी ओर रम्मू जी के विचार बहुत मेल खाते थे विष्णु जी रम्मू जी को भैया ही कहते थे उन दिनों प्रेस के मायने अलग थे चोथे स्तम्भ की गरिमा थी पाठक भी जगरूप था लेखन पर जबरजस्त रियाक्सन होता था उन दिनों अग्रदूत शाम का इकलोता अख़बार होता था प्रसार संख्या भले ही काम थी पर रीडर शिप बहुत थी अख़बार बांटते -बांटते शाम सात बजे अग्रदूत कि खबरे सुर्ख़ियों में रहती थी चाय की गुमटियों में काफी हॉउस में, मेखानो में, जिले के तमाम पुलिश थानों में अग्रदूत का इंतजार होता था ख़बरें राजनीती की हों या अपराध की बिना पढ़े पाठक रह नहीं सकता था पाठक अग्रदूत का एडिक्ट हो गया था अखबार को इस स्तर पर पहुचने वाले विष्णु जी १७ नवम्बर को पाँच तत्व में विलीन हो गए |
मेरा दुर्भाग्य था कि में छत्तीसगढ़ से बहार था मुझे फेस बुक सन्देश पर यह सूचना मिली की विष्णु भैया नहीं रहे बीमार हें यह तो पता था बीमारी भी पता थी में मिलने भी गया था संस्मरणों को लेकर बातें भी हुई थी तमाम खट्टी मीठी यादों को याद कर विष्णु जी की वह मुस्कान हमेश याद रहेगी वो बीमार थे पलंग पर लेते थे उन दिनों शरीर थका था मन नहीं था काफी अरसे के बाद इन परस्तिथियों में मुलाकात हुई थी बातें होते होते लटे सिन्हा जी टिक कर बैठ गए मन बदला बातचीत के दोरान उन्होंने कहा की बहुत दिनों के बाद कुछ बत्याने में मजा आया हे मेने पूछ ही लिया की भैया मजा आया की आनन्द इस पर वो खुल कर हँसे बोले मजा नहीं आनन्द |इस आनन्द मजा में क्या फर्क हे पर सिन्हा जी के तर्कों ने घंटों हँसाया था |
पत्रकारिता के भीष्म पितामह को नमन ...................
महाबली को थप्पड़ पड़ा
महाबली को थप्पड़ पड़ा >>>>>>>>>>>>>सरदार के थप्पड़ की गूंज पूरे देश में सुनाई पड़ी चारो ओर उसकी कड़ी निंदा भी की गई विरोधियों ने निंदा तो की पर सरदार के दुःख को भी
जायज ठहरा दिया कांग्रेस का बयान सबसे हल्का था वह इस में राजनीती खोज रही थी की किसी तरह भा जा पा पर इसका ठीकरा फोड़ दिया जाये और उसने किया भी यही कह दिया की सिन्हा के बयान से सरदार को प्रेरणा मिली और पहला जोरदार थप्पड़ पवार को पड़ा मुलायम ने कहा यह हिंसा नहीं हे जनता का अकोश हे महगाई ओर बेरोजगारी का जीताजागता नमूना हे| जिसे थपड पड़ा उसने घर जाकर चेनलों को बयान दिया कि घटना को भूल जाइये एसा क्यों कहा पवार ने सोचने लायक बात हे तमाम बाहुबलियों को चेतावनी भी हे की हजारो करोड़ के नेतापतिओं की आगे यही गति होना हे सचेत जाओ| थप्पड़ की गूंज चेनलनो के जरिये पूरे देश में गूंजती रही महाराष्ट्र में तो थपड की आवाज इतनी जोरदार थी की जनता सड़क पर आगई नेशनल हाइवे जाम कर दिया |महाराष्ट्र के बाहुबली को थप्पड़ घोर अपमान हे |अब जो भी कहो थप्पड़ तो पड़ ही गया हे बाहुबली की इज्जत मिटटी में मिल गई हे विरोधी मंद मंद मुस्करा रहे हें घडियाली अंशु बहा रहे हें शरद जी घर में बेठे गाल सहला रहे हें निंदाओं का दोर जरी हे गरमा गरम बहस चेनलों के लिए तैयार हे पिटे पवार के कंधे पर बन्दुक रख नेता अपना अपना निशाना साध रहे हें पवार के लाल गल पर उभरी सरदार की उँगलियों पर कोई मरहम लगाने तैयार नही हे |
मामला यहाँ थप्पड़ का नहीं हे मामला हे की युवक को गस्सा क्यों आया इतनी बड़ी गलती कर युवक को बिलकुल भी अफसोश नहीं हे उसने कहा की सब चोर हें में मर्द हूँ और मरूँगा ये गुस्सा क्यों हे | जिस देश की जवानी बेरोजगार हो वहां सरदार जेसे करोड़ों युवक हे जो इन धनपति नेताओं से एसी ही नफरत करते हें हजारो करोड़ के काले धान से लबरेज इन नेताओं के एयासी के किस्से जब ये युवक टी व्ही पर सुनते हे अख़बारों में पढ़ते हें और फिर वो अपने आपको तोलते हें नफरत का वायराश उसे वक्त उनके दिलो दिमाग पर तेरने लगता हे की हमने क्या बिगाड़ा हे हमारे विकास की राशी इनकी तिजोड़ी में और हम सड़क पर यही हे असली गुस्सा इन युवकों का जो पवार पर भरी पड़ा महगाई को लेकर पवार के जो बयान आते थे वो मरहम की वजाय नमक ही छिड़कते थे जादू की छड़ी का जुमला इन्ही का था फिर धीरे -धीरे यह जुमला मनमोहन जी भी बोलने लगे मामला प्याज का हो या चीनी का जनता की अदालत में पवार ही घेरे में रहे झल्लाए पवार उल जलूल बयान देते रहे संवेदनहीनता से दिए गए बयानों का ही फल हे जो पवार के गल पर तमाचे के रूप में उभरा हे पवार भले ही कोप भवन ने बेठे ये बयान दे रहे हों के घटना को भूल जाया जय पर उनकी आत्मा इस वक्त गिलानी से भरी ही होगी कहावत हे की जिसको पड़ती हे पीर वही समझता हे
Tuesday, 15 November 2011
Monday, 14 November 2011
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