Wednesday, 9 November 2011

Gmail - पुण्य कमाने ओर बेचने की होड़ ने हादसे को जन्म दिया - achoubey242@gmail.com

Gmail - पुण्य कमाने ओर बेचने की होड़ ने हादसे को जन्म दिया - achoubey242@gmail.com:

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पुण्य कमाने और पुण्य बेचने की होड़ में यह हादसा हुआ हे पूण्य कमाने की लाइन में पाँच लाख लोग लगे थे पूण्य बेचने के स्टाल सिर्फ पन्द्र सो ही थे इसलिए भाग दाढ़ मच गई और बीस पुनात्माओं को इस पापी संसार से मुक्ति मिलगई| गायत्री परिवार के शताब्दी कार्यक्रम में यह हादसा हुआ हे हादसा अविवस्था के कारण ही हुआ हे इतनी बड़ी तादात में पंडाल में हवन ,साँस तो घुटने वाली ही थी धर्म के नाम पर सीधे हाई कार्बन डेनसिटी हवा , फेंफडे कब तक झेल सकते थे वहां तो आक्सीजन की कमी होना ही थी मनुष्य को साँस लेने में जब तकलीफ हो तो वह असंतुलित होता जाता हे और बेहोसी की स्तिथि में हादसे का शिकार बन जाता हे |
बेचारे शर्माजी की जन्म शताब्दी पर यह कलंक लगना था सो लग ही गया एसे हादसे इसतरह की भीड़ में होना स्वाभिक हे ये ना हों इसकेलिए शासन बाकायदा इंतजाम रखता हे बढती भीड़ को देख कर वह भीड़ को रोक भी सकता हे उसे कानूनन अधिकार हे तरह के निर्णय लेने का फिर ये लापरवाही केसे हुई इस मामले शासन से कंहा चूक हुई खबर थी की इस समारोह में शामिल होने के लिए देश भर के मुख्यमंत्री ,नितिन गडकरी जेसे भरी भकम नेता ,और कई जेड प्लस सुविधा से लेश व्ही आइ पी सरिक होने वाले थे सो शासन व्ही आई पी यों की सेवा में मस्त था उसे आम जनता की चिंता कहाँ थी वहां तो अधिकारी अपने नंबर बढ़ने में लगे थे |
शसन को अब इस तरह के आयोजनों के लिए बाकायदा गाइड लाइन जरी करना चाहिए उस गाइड लाइन को आयोजकों से कडाई से पालन भी करवाना चाहिए इस तरह के हादसों की खबरों से भारत की भरी बदनामी होती हे संदेश गलत जाता हे की एक धार्मिक कार्यक्रम में हुई भगदड़ में लोग मरे गए खबर यह संदेश देती हे की आज भी भारत में सिविल लाइफ का स्तर बहुत ही गिरा हुआ हे धार्मिक समारोह में भगदड़ शर्म की बात हे धार्मिक स्थलों पर तो श्रद्धालु बड़े अनुसासन में रहते हें, शालीनता में रहते हें किसी को धोके से भी कष्ट ना हो इसका विशेष ध्यान रखते हें गीता धाम का आलम यह था की अधिकतर मोतें उनकी हुई जो जनता के पैर तले अगये, बूढी हो ,बूढ़ा हो ,बच्चा हो , किसी को नहीं बक्शा भीड़ ने मेरा इस मामले में मानना हे की जोभी मानव गायत्री धाम में आये थे वो भक्त नहीं थे वो भीड़ थी जो बेकाबू होगाई ओर मानव की स्तिथि जानवरों से भी बत्तर हो गई | शर्मा जी अपने कान में फूंक कर इस भीड़ को अपना चेला तो बना लिया मन्त्र भी रटवा दिया पूरे देश में अपना माया जाल भी फेला लिया लाखों मूनड़ीओं की गिनती कर अपने अपनी धर्म की छोटी सी दुकान को सुपरमार्केट बना लिया वाह आपके ब्र्हम्लिन होने के बाद आपके उतराधिकारियों ने इसे सुपर मॉल बनाने की कोशिस की ओर घड़ा भर गया था बीस निर्दोष जाने मुक्त होगई, सेकड़ों घयल होगये ,आस्था की बलि चढ़गई, हरी की भूमि नेर्दोशों के खून से रंग गई ,मेरा उन तमाम साधू संतों से अनुरोध हे की चेलों के कान में फूंक कर गिनती कि वृधि ना करें चेलों को कुछ शिक्षा भी दें कमसे काम मानव की तरह जीना तो सिखालायं या फिर चेलों से सिर्फ भर रसीद कटवायं, ? पुण्य कमाने ओर बेचने की होड़ ने हादसे को जन्म दिया
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