Monday, 23 April 2012

Gmail - अपहरण का अनंत - achoubey242@gmail.com

Gmail - अपहरण का अनंत - achoubey242@gmail.com:

'via Blog this'अपहरण का अनंत >>>>>>>>>>>>>>>सुरक्षा  कि खामियों के चलते मेनन का अपहरण हुआ इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता घोर नक्सली इलाके में सर्फ दो गार्डों के भरोसे सभा?कलेक्टर ने अपनी जन तो जोखिम में डाली ही थी  सभा में आये किसानो को भी मुस्किल में डाला दिया  था मेमन कि लापरवाही ने अब सरकार कोभी चिंता में डाल दिया हे नक्सलीओं ने कहा हे की आठ दबंग किस्म के नक्सलीओं  को  छोड़ा जाय  अपहरण का तो  अंजाम  यही होना था सरकार पर  दबाब बना हे की जरी  सूची के मुजरिमों को  रिहा करो उन नक्सलीओं को जिनको पकड़ने में सरकार के  हाथ पैर फुल गया थे बड़ा ही सरल ओर  उत्तम  किस्म का खेल हे ये अपहरण| भगवन ना करे  यदि  एसी परंपरा चली तो कसब को अफजल  को ओर ना जाने  कितने देश के दुश्मनों को छोड़ना पड़ सकता हे ?
बेस ने कहा हे की पुलिश  अफसर अपनी गुट बजी में मस्त रहते हें एसी में बैठ कर सिवाय एक दुसरे कि टांग खीचने के अलावा कुछ नहीं करते शर्मनाक बात हे की  सरकार का इतना महत्वपूर्ण कार्य क्रम  ग्राम स्वराज  चल रहा हे जिसकी तैयारियां माह भर   से चल रहीं हें  ओर उसकी सुरक्षा इतनी लचर नक्सली  इनका लंगोट उतारकर लगाये इनको पता ही नहीं चला चोबीस घंटे  बीत गए हें सरकार  ये पता नहीं लगा पा रही  हें कि मेनन कहाँ हे किस हाल  में हे सरकार के पास  बीसों बटालियन ओर हजारों पुलिस वाले  एक  कलेक्टर का पता लगाने में नाकाम हें ?
प्रदेश के एक अख़बार ने लिखा हे की नक्सलीओं ने अपनी रणनीति बदल दी हे  नक्सली अब माओवादी नहीं रहे नक्सली कांग्रेसी हो गए हें तुरत टिपणी का क्या आशय हे ये पता नहीं पर जिस तरह कांग्रेसी नेता चाहे जोगी हों या हरी प्रसाद वे भाजपा को ही इस मामले में दोषी  बता रहे हें इस तरह से  टिपणी महत्व पूर्ण हे |
मेरा मानना हे कि जब तक इनको इनके घर में  घुस कर नहीं मारोगे  तबतक ये एसे ही डारावते   रहंगे ओर आम जनता में दहशत  फेलाते रहेंगे इस मारा मरी में  दोचार निर्दोस भी मरे जाते हे तो कोई प्रवाह नहीं इनको पकड़कर पालने  को जरुरत नहीं हे मोत का  भय  जब तक इनको नहीं होगा ये हमारे लचर कानून का फायदा उठाते रहेंगे ओर अपहरण कर मुजरिमों को छुड्वाते रहेंगे मेरा मानना हे ही मुजरिमों को ना छोड़ कर इन्हें घेर कर मरना चाहिए अपनी ताकत का अंदाजा इन्हें करवाना चाहिए इन्हें मजबूर करा देना चाहिए कि मेनन को बिना नुकसान पंहुचाये छोड़ें नहीं तो वो दिन दूर नहीं कि जब वो  गृह मंत्री को अगुवा करलें ओर मांग रखें कि हमको मुख्य मंत्री बनाओ >>>>> जय हिंद

Wednesday, 11 April 2012

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संचेती का सच >>>>>>संचेती ने नदगांव की ओर से प्रवेश किया नदगांव   ओर भटगाव की यात्रा संचेती बंधुओं ने  छत्तीसगढ़ में की करीब दो सो किलोमीटर की इस व्यापारिक  यात्रा में संचेती ने छत्तीसगढ़ सरकार को करीब दो हजार पांचसो  करोड़ का चुना लगाया ओर खनिज मिगम के सहारे सरकार को   कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया हे | रवि शंकर जी कहते हें की व्यापारिक सांसद को व्यापर  करने का मोलोक हक़ प्राप्त हे बशर्त पूरे प्रकरण में पारदर्शिता हो  |पारदर्शिता कि शर्त सरकार को पूरी करना हे मेरा मानना हे   कि सरकार ने गलती नहीं कि होगी  | महालेखाधिकार की रपट में कहा गया हे की  केन्द्रिय जोलालिकल ने कहा हे की दोनों खदानों का कोयला  उच्य श्रेणी का हे संचेती ने भी प्रयावार्ण मंजूरी लेते समय कहा हे कि पछ्पन प्रतिसत  कोयला   उच्य श्रेणी का हे लिकिन खनिज निगम  ने कहा हे कोयला निम्म  श्रेणी का हे ओर नेविदा  का प्रकाशन  कर दिया भटगावों का आधा  हिस्सा ओपन खनन का हे ओर आधा अंडरग्राउंड  खनन का हे  दोनों मामलों में दूरी इतने काम हे कि कोयेले कि क्वालटी में कोई अंतर नहीं हे पर दोनों के दोहन में अंतर हे एक की मैनिंग काष्ट अधिक हे दुसरे की काम इसलिय भी भूगर्भविभाग ने इस ब्लाक को दो भागों में बांटा हे लगत का मूल्य पर  भारी  असर होता हे अंडरग्राउंड खनन महंगा तो हे इसलिए इस ब्लाक के मूल्य निर्धारण में प्रक्रया अलग होना थी  खनिज नेगम महालिखाधिकार के सामने एसे दस्तावेज नहीं देपाया जिस से काम दरों कि प्रमाणिकता पर  सहमती बन सके  महालिखाधिकार ने घटे की आयु बत्तीस वर्ष राखी हे इस अनुमान से प्रति वर्ष निगम को बत्तीस करोड़ कि हानि होगी बत्तीस वर्ष पर बत्तीस करोड़ का आंकड़ा निगम को भरी पड़ा हे   >>> आगे ......
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Monday, 2 April 2012

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Gmail - निशा घाटी का नशा > - achoubey242@gmail.com

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निशा घाटी  का नशा >>>>>रायपुर से 180 km दूर उड़ीसा की सीमा से लगी निशा घाटी ने हमें मदहोस करदिया  महुआ के पेड़ों से भरी घाटी में हम जब पंहुचे तो महुए के फूलों की महक से घाटी सराबोर थी मदहोस कर देने वाली खुशबु  ने हमारी थकन को तो दूर कर ही दिया कला चाँद बेगा ने हमारा स्वागत किया घनघोर जंगल  में ऊँची पहाड़ी से गिरते झरने के किनारे बांस ओर पत्तों की इस झोपडी में बैठ कर हम बेगा से निशा घटी कि जानकारी ले ही रहे थे कि बेगा की पत्नी ने भुने हुए महुआ फूलों के साथ महुए के रस को दोना में हमारे सामने परोस दिया उसने अपने भाषा  में जो के उड़िया में बोल रही थी आगाह किया कि हम उसकी बोली तो नहीं समझ रहे रहे थे पर उसके हाव  भाव  से लगा रहा था की जो कुछ हे ग्रहण करें मेने जीवन में पहली बार भुने हुए महुओं के फूलों  का स्वाद लिया रस पीने  में पहले तो काफी कठनाई हुई पर थोड़ी देर में सब सामान्य हो गया टूटी फूटी हिंदी ओर उनके हाव भाव से हम ने बातचीत का सिलसिला जरी रखा महुआ रस का आन्नद जब धीरे से अपने शबाब  पर पंहुचा तो हम घटी के झरने का आनन्द लेने उसके गर्भ ग्रह में पहुचे एक घंटे  ही बीते होंगे आन्नद लेते हुए  करीब दो बजे थे की दूर से  नगाड़ों की आवाज ओर जंगली पक्षियों के शोर  ने  हमारे आनन्द में खलल डाली तभी  कला चाँद भागता हुआ हमारी ओर आया ओर तुरत झरने  से बहार निकलने  ने को कहा हम कुछ समझ पाते  अन्न फानन में झरने के बहार निकले ओर करीब भागते हुए उसकी झोपड़े के पास आकार रुके ही थे की उस  झरने के पास बीस से भी अधिक भालुओं का एक झुण्ड झरने के अस पस हमारे छोड़े हुए सामान जिसमे मिनरल वाटर बिस्कुट नमकीन के पेकिट सिगरेट से भरे पिलास्तिक के थेलों की चिर फाड़  करने में जुटे भालुओं को हम  देख रहे थे भालुओं की इस टोली को देख जहा  हमारी सांसे फूली हुई थी वहीँ हमारी रक्षा  के लिए बेगा अपनी तईयारी  में लगा हुआ  था  उसने हम  सभी को लकड़ी मसलें थमा दी जो उस वक्त जली नहीं थी कला चाँद ने  कहा की अब यहाँ ठहरना  ठीक नहीं ये भालू  जल्दी से भागने वाले नहीं हें झोपडी से दूर पहाड़ी की दालान पर हमारी गाड़िया खाड़ी थीं सो हम बिना जली मसलों के साथ दहलन की ओर चल दिए इस भागम भाग में हमारे मित्र का मोबाईल वहीँ झरने के पास छुट गया था चलते चलते मेने उसके मोबाईल पर डायल किया घंटी बजी हमने दूर से पलट कर देखा तो हमें लगा की भालू अचानक जिस तरफ से आये थे उसी दिशा  में भाग रहे हें इस भागते  हुए नज़ारे को देख  कर हम ठहर गए घंटी  का जाना बंद हुआ मेने फिर से डायल किया घंटी पुनः  जा रही थी  हमें भालू भागते  नजर आ रहे थे बड़ा ही अजीब माहोल था हमने मित्र  से पूछा की कोन सी  टोन हे जो भालुओं को डरा रही हे  अब हिम्मत हो तो जाओ ओर मोबाईल उठा लाओ मोबाईल का लालच भी था बेगा को तैयार किया कि इसे कुछ पेसे का लालच दो तो शयद बात बने पर हमने  ध्यान से दिखा भालू जादा दूर नहीं भागे थे सो मोबाईल की बलि चढाई ओर वापिस सोहिला पंहुचे 
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