तेल कम्पनियां >>>>>>>>>>>>>>>>.घटा फिर घटा ये एसी कहानी हे की इससे निजात पाने के लिए कम्पनियों को अपने गरेबान में भी झांक कर देखना चाहिए की उनका स्टेब्लेशमेंट का खर्च क्या हे उनके टीए डीए इस वक्त कहाँ जा रहे हें फ्जुली खर्च का ग्राफ कहाँ जा रहा हे तेल के सोदे दो तरह के होते हें एक लम्बी डील रेट के ओर एक तत्काल रेट के इन तेल कम्पनियों ने कभी अपने खर्चे पर लगाम लगाई सुना नहीं इन ने धंधा बनालिया हे की बेरल के रेट बढे नहीं की रोना शुरु कर दिया उसपर सोनिया सरकार नमक छेडाकने का काम सबसे पहले करती हे तेल कम्पनिया हमारे बस में नहीं तो तुम्हरे बसमे सिर्फ भ्रस्ताचार हे 2G एक लाख सत्त्र्हजर करोड़ का घपला भारत की जनसँख्या एक सो बीस करोड़ सिर्फ इसी घुटाले को लें तो प्रति व्यक्ति चोदाह सो करोड़ बेठता हे ये घुटाले बाजों से पेसे बसुलो ओर जनता को रहत दो गोरी चमड़ी को क्या फर्क पड़ता हे वह तो इस्ट इंडिया की तरह काम कर रही हे उसके बल गोपाल मजे में हें नेहरु से लेकर सोनिया तक सभी घुटाले में सरिक हें इनके डी एने ये में घुटालों के जींस हें उस पर वह बंगाली जो अपने आखरी पाली खेल रहा उसके बस में सिर्फ ओर सिर्फ बयान देना हे टेक्स स्तेक्चार पर कोई बात नहीं करता तेल आर इतना टेक्स हे उसे काम नहीं करता उस पर वह सरदार उसने जीवन में कभी नहीं सोचा होगा कि वह कभी इतनी ऊँची कुर्सी पर बैठ पायेगा अकाल से पैदल सरदार अपने आपको वितत्य का जानकर कहता हे एसा जानकर जो घुटालों के रिकार्ड बना रहा हे सत्ता धारीओं को लुटने की खुली छुट दे राखी हो अकाल से पैदल सरदार ने देश को बर्बाद कर दिया हे ओर बेशमो की भांति कुर्सी पर बेठा हे>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> >>>>>>>>>> जय हिंद
Saturday, 31 March 2012
Monday, 26 March 2012
(33) Facebook
(33) Facebook:डरपोक सेना प्रमुख >>>>>.सेना प्रमुख ने कहा हे की सेना में भ्रष्टाचार केंसर कि तरह फेल गया हे इसकी पुष्टि करने के लिए उन्होंने उदाहरण के तोर पर कहा कि मुझे भी चोदाह करोड़ की घुस देने के लिए आफर था जिसे मेने मंत्री जी को बताया मामला तजा नहीं पुराना हे पुराने मामले को उजागर कर सेना प्रमुख ने मंत्री जो को संदेह के घेरे में ला दिया हे उनका यह कहना कि मेने तो मंत्री को बतला दिया था अब मंत्री जाने ओर घुस देने वाला जाने ये बयान देश के प्रमुख सेना पति का हे जिसके ऊपर देश कि सुरक्षा का भार हे इसमें संदेह नहीं कि उनने भष्टाचार के केंसर को उजागर करने के लिए इस तरह का बयान दिया हे पर प्रश्न यह भी हे की इसतरह के दलाल को उन्होंने उसी वक्त हिरासत में क्यों नहीं लिया मंत्री को सूचित कर क्या वह उनकी सहमती जानना कहते थे कि घुस लूँ या ना लूँ कियोंकि दोनों ने उस मामले में अभी तक चुप्पी साध राखी थी अचानक जब उनकी जन्म तिथि का गरमाया ओर अन्थोनी ने उनका साथ नहीं दिया तो उन्होंने इस मामले में मंत्री को भी घसीट लिया ओर पूरे देश में यह सन्देश देदिया कि मंत्री जी चुप थे मतलब देश के दो प्रमुख उस बिचोलिये पर कोई कार्यवाही नहीं कर सके या करना नहीं चाहते थे इस मामले में दोनों डाक्टर -डाक्टर खेल रहे थे जबकि दोनों सक्षम थे कार्यवाही करने के लिए फिरभी कार्यवाही नहीं की अब जब मामला आम होगया तो मंत्री ने मामले को सी बी ई को देदिया हे इस तरह के चालचलन से मंत्री तो दोसी हें पर उनसे बड़ा दोषी तो खुद सेना प्रमुख हे जिसने जल में आये शिकार को जाने दिया मुझे तो लगता हे कि सेना प्रमुख ने जो बयान अभी दिया हे उससे तो लगता हे की वे मंत्री से बदला ले रहे यह तो यही बात हुई की यदि सामने वाले कि दोनों आंखे फूट रही हें तो वो अपने भी एक आंख फुड्वाने तैयार हें इस मामले में दोनों दोषी हें >>>>>>>>>>>>>>> जय हिद
'via Blog this'
'via Blog this'
Saturday, 24 March 2012
सदन की गरिमा .>>>>>> सरकार सदन के प्रति जबाब देह हे पर आज का विपक्ष सिर्फ टाइम पास करता हे ना तो सदन में मुदों पर चर्चा होती ना सरकार की जनहित में खिचाई वंहा तो एक दूसरे की व्यतिगत छवि बिगड़ने के आलावा सदन में ओर कुछ नहीं होता विपक्ष सिर्फ पर सिर्फ इसलिए सदन जाता हे की वह खबरों में केसे आये जनहित के मुदों पर भी विपक्ष जबरन टोकाटाकी कर महत्वपूर्ण विषय पर भी अपनी हीन भावना को ही उजागर करता हे मसलन यदि सदन में नक्सल समस्या पर चर्चा हो रही हे तो उसमे भी वह सर्फ ओर सर्फ कटाक्ष ही करता हे विपक्ष उसे राज्य की समस्या नहीं मानता वह इसमे लगा रहता हे की यह समस्या आपके कार्यकाल की हे आप जाने हम तो सिर्फ नमक छिड़कने का ही काम करेंगे इस सोच की भावना से सदन में बेठे हमारे ही प्रतिनिधि अपनी हार का बदला चुकाते रहते हे जबकी वोटर ने वोट देते समय यह नहीं सोचा था की सदन में जाकर यह प्रतिनिधि राज्य की समस्या को बदले के चश्मे से देखेगा सदन में बैठकर राज्य हित की समस्याओं को एक साथ मिलकर दूर करें ओर जनता को राहत दें एसा आज के जन प्रतिनिधि सोचते ही नहीं हें वह तो अपनी हार का बदला या फ्रास्तेसन से प्रेरित होकर सदन का समय ओर पैसा बर्बाद करते रहते हें विकास की जुमेदार सरकार की कानून सरकार जाने हम तो सिर्फ ओर सिर्फ ऊँगली ही करेंगे जनता ने तुम्हे वोट दिया हे तो जबदारी भी दी हे चाहे सरकार किसे कि हो जनता तो तुम्हारी हे >>>>>>>>>>>>>>>>>> जय हिंद
Monday, 19 March 2012
Saturday, 17 March 2012
Wednesday, 14 March 2012
Subscribe to:
Posts (Atom)