सदन की गरिमा .>>>>>> सरकार सदन के प्रति जबाब देह हे पर आज का विपक्ष सिर्फ टाइम पास करता हे ना तो सदन में मुदों पर चर्चा होती ना सरकार की जनहित में खिचाई वंहा तो एक दूसरे की व्यतिगत छवि बिगड़ने के आलावा सदन में ओर कुछ नहीं होता विपक्ष सिर्फ पर सिर्फ इसलिए सदन जाता हे की वह खबरों में केसे आये जनहित के मुदों पर भी विपक्ष जबरन टोकाटाकी कर महत्वपूर्ण विषय पर भी अपनी हीन भावना को ही उजागर करता हे मसलन यदि सदन में नक्सल समस्या पर चर्चा हो रही हे तो उसमे भी वह सर्फ ओर सर्फ कटाक्ष ही करता हे विपक्ष उसे राज्य की समस्या नहीं मानता वह इसमे लगा रहता हे की यह समस्या आपके कार्यकाल की हे आप जाने हम तो सिर्फ नमक छिड़कने का ही काम करेंगे इस सोच की भावना से सदन में बेठे हमारे ही प्रतिनिधि अपनी हार का बदला चुकाते रहते हे जबकी वोटर ने वोट देते समय यह नहीं सोचा था की सदन में जाकर यह प्रतिनिधि राज्य की समस्या को बदले के चश्मे से देखेगा सदन में बैठकर राज्य हित की समस्याओं को एक साथ मिलकर दूर करें ओर जनता को राहत दें एसा आज के जन प्रतिनिधि सोचते ही नहीं हें वह तो अपनी हार का बदला या फ्रास्तेसन से प्रेरित होकर सदन का समय ओर पैसा बर्बाद करते रहते हें विकास की जुमेदार सरकार की कानून सरकार जाने हम तो सिर्फ ओर सिर्फ ऊँगली ही करेंगे जनता ने तुम्हे वोट दिया हे तो जबदारी भी दी हे चाहे सरकार किसे कि हो जनता तो तुम्हारी हे >>>>>>>>>>>>>>>>>> जय हिंद
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