Saturday, 31 March 2012

तेल कम्पनियां >>>>>>>>>>>>>>>>.घटा फिर घटा ये एसी कहानी हे की इससे निजात पाने के लिए कम्पनियों को अपने गरेबान में भी झांक कर देखना चाहिए की उनका स्टेब्लेशमेंट का खर्च क्या हे उनके टीए डीए इस वक्त कहाँ जा रहे हें फ्जुली खर्च का ग्राफ कहाँ जा रहा हे तेल के सोदे दो तरह के होते हें एक लम्बी डील रेट  के ओर एक तत्काल रेट के इन तेल कम्पनियों ने कभी अपने खर्चे पर लगाम लगाई सुना नहीं इन ने धंधा बनालिया हे की बेरल के रेट बढे नहीं की   रोना शुरु कर दिया उसपर सोनिया सरकार नमक छेडाकने का काम सबसे पहले करती हे तेल कम्पनिया हमारे बस में नहीं तो तुम्हरे बसमे सिर्फ भ्रस्ताचार हे 2G एक लाख सत्त्र्हजर करोड़ का घपला  भारत की जनसँख्या एक सो बीस करोड़ सिर्फ इसी  घुटाले को लें तो प्रति व्यक्ति चोदाह सो करोड़ बेठता हे ये घुटाले बाजों से पेसे बसुलो ओर जनता को रहत दो गोरी चमड़ी को क्या फर्क पड़ता हे वह तो इस्ट इंडिया की तरह काम कर रही हे उसके बल गोपाल मजे में हें नेहरु से लेकर सोनिया तक सभी घुटाले में सरिक हें इनके डी एने  ये में घुटालों के जींस हें उस पर वह बंगाली जो अपने आखरी पाली खेल रहा उसके बस में सिर्फ ओर सिर्फ बयान देना हे टेक्स स्तेक्चार पर कोई बात नहीं करता तेल आर इतना टेक्स हे उसे काम नहीं करता उस पर वह   सरदार उसने जीवन में कभी नहीं सोचा होगा कि वह कभी इतनी ऊँची कुर्सी पर बैठ पायेगा अकाल से पैदल सरदार अपने आपको वितत्य का जानकर कहता हे एसा जानकर जो घुटालों  के रिकार्ड बना रहा हे सत्ता धारीओं को लुटने की खुली छुट दे राखी हो अकाल से पैदल सरदार ने देश को बर्बाद कर दिया हे  ओर बेशमो की भांति कुर्सी पर बेठा हे>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>  जय हिंद 

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