Sunday, 16 September 2012


करोड़ों दिलों में राज करने वाले मरते नहीं अमर हो जातें हें एसे ही व्यतित्व के धनी थे सुदर्शन जी जिस गणवेश को उन्होंने नो वरस कि उम्र में धारण किया उसी गणवेश में मोक्ष को प्राप्त हुए कितना लगाव था उन्हें पाने करनी पर हिन्दत्व की पूजा करते हुए पूरा जीवन अखंड हिंदुत्व की परिकल्पना में बिता दिया हिंदुत्व की जो परिभाषा उन्होंने दी हे वह अधभुत हे सभी धर्मो को सामान आदर ओर मर्यादित रह कर ही समवृधि कि कल्पना थी उनकी संघ के वो एसे इकलोते नेता थे जो दूसरे समाजों में भी सम्मानीय रहे हें उन्होंने संघ की विचारधारा के कट्टर विरोधिओं को भी यह बतला दिया था की मेरे हिंदुत्व को लेकर भ्रम ना पालें सर्व समाज का हिदुत्व हे मेरा हम जिस भूमि में जन्मे हें उसकी पूजा करना उस भूमि में रहने वालों के सम्मान के लिए मर मिटना वहां की तरक्की खुशाली के लिए सदा खुले मान से तैयार रहना यही सही हिंदुत्व हे भारत का इसी हिंदुत्व कि लेकर सुदर्शन जी ने अपनी अंतिम साँस रायपुर में ली वो महान आत्मा ही थी जो इसे भूमि में पैदा हुई ओर इसे भूमि में अंतिम साँस ली विरलों के साथ एसा होता हे जो जागते हुए अपनी मोंत का स्वागत करते हें एसे युग पुरुष मरते नहीं अमर हो जाते हें उनकी हिंदुत्व की विचारधारा आज नहीं तो कल इस हिदुस्तान को अपनाना पड़ेगी नहीं तो हमारा समाज आज जिस दिशा हीनता की ओर जा रहा हे उसमे घ्रणा के अलावा कुछ नहीं हे हिंदुत्व इस की इजाजत कभी नहीं देता अमर सपूत को सत सत नमन >>>> जय हिंद
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