करोड़ों दिलों में राज करने वाले मरते नहीं अमर हो जातें हें एसे ही व्यतित्व के धनी थे सुदर्शन जी जिस गणवेश को उन्होंने नो वरस कि उम्र में धारण किया उसी गणवेश में मोक्ष को प्राप्त हुए कितना लगाव था उन्हें पाने करनी पर हिन्दत्व की पूजा करते हुए पूरा जीवन अखंड हिंदुत्व की परिकल्पना में बिता दिया हिंदुत्व की जो परिभाषा उन्होंने दी हे वह अधभुत हे सभी धर्मो को सामान आदर ओर मर्यादित रह कर ही समवृधि कि कल्पना थी उनकी संघ के वो एसे इकलोते नेता थे जो दूसरे समाजों में भी सम्मानीय रहे हें उन्होंने संघ की विचारधारा के कट्टर विरोधिओं को भी यह बतला दिया था की मेरे हिंदुत्व को लेकर भ्रम ना पालें सर्व समाज का हिदुत्व हे मेरा हम जिस भूमि में जन्मे हें उसकी पूजा करना उस भूमि में रहने वालों के सम्मान के लिए मर मिटना वहां की तरक्की खुशाली के लिए सदा खुले मान से तैयार रहना यही सही हिंदुत्व हे भारत का इसी हिंदुत्व कि लेकर सुदर्शन जी ने अपनी अंतिम साँस रायपुर में ली वो महान आत्मा ही थी जो इसे भूमि में पैदा हुई ओर इसे भूमि में अंतिम साँस ली विरलों के साथ एसा होता हे जो जागते हुए अपनी मोंत का स्वागत करते हें एसे युग पुरुष मरते नहीं अमर हो जाते हें उनकी हिंदुत्व की विचारधारा आज नहीं तो कल इस हिदुस्तान को अपनाना पड़ेगी नहीं तो हमारा समाज आज जिस दिशा हीनता की ओर जा रहा हे उसमे घ्रणा के अलावा कुछ नहीं हे हिंदुत्व इस की इजाजत कभी नहीं देता अमर सपूत को सत सत नमन >>>> जय हिंद
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