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संचेती का सच >>>>>>संचेती ने नदगांव की ओर से प्रवेश किया नदगांव ओर भटगाव की यात्रा संचेती बंधुओं ने छत्तीसगढ़ में की करीब दो सो किलोमीटर की इस व्यापारिक यात्रा में संचेती ने छत्तीसगढ़ सरकार को करीब दो हजार पांचसो करोड़ का चुना लगाया ओर खनिज मिगम के सहारे सरकार को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया हे | रवि शंकर जी कहते हें की व्यापारिक सांसद को व्यापर करने का मोलोक हक़ प्राप्त हे बशर्त पूरे प्रकरण में पारदर्शिता हो |पारदर्शिता कि शर्त सरकार को पूरी करना हे मेरा मानना हे कि सरकार ने गलती नहीं कि होगी | महालेखाधिकार की रपट में कहा गया हे की केन्द्रिय जोलालिकल ने कहा हे की दोनों खदानों का कोयला उच्य श्रेणी का हे संचेती ने भी प्रयावार्ण मंजूरी लेते समय कहा हे कि पछ्पन प्रतिसत कोयला उच्य श्रेणी का हे लिकिन खनिज निगम ने कहा हे कोयला निम्म श्रेणी का हे ओर नेविदा का प्रकाशन कर दिया भटगावों का आधा हिस्सा ओपन खनन का हे ओर आधा अंडरग्राउंड खनन का हे दोनों मामलों में दूरी इतने काम हे कि कोयेले कि क्वालटी में कोई अंतर नहीं हे पर दोनों के दोहन में अंतर हे एक की मैनिंग काष्ट अधिक हे दुसरे की काम इसलिय भी भूगर्भविभाग ने इस ब्लाक को दो भागों में बांटा हे लगत का मूल्य पर भारी असर होता हे अंडरग्राउंड खनन महंगा तो हे इसलिए इस ब्लाक के मूल्य निर्धारण में प्रक्रया अलग होना थी खनिज नेगम महालिखाधिकार के सामने एसे दस्तावेज नहीं देपाया जिस से काम दरों कि प्रमाणिकता पर सहमती बन सके महालिखाधिकार ने घटे की आयु बत्तीस वर्ष राखी हे इस अनुमान से प्रति वर्ष निगम को बत्तीस करोड़ कि हानि होगी बत्तीस वर्ष पर बत्तीस करोड़ का आंकड़ा निगम को भरी पड़ा हे >>> आगे ......
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