'via Blog this'मोदी ने अडवानी और सिर्फ अडवानी ही संबोधित किया जी कहीं नहीं लगाया >>>>>>>मोदी और अडवानी बी जे पी के दो चहरे हें एक संघ की पसंद का हे तो दूसरा खुद की और अपनी ही किचिन केबनेट का |इस वक्त बी जे पी के अन्दर इन दो चेहरों को लेकर भरी गहमागहमी चल रही हे | जग जाहिर हे की उपवास और यात्रा को लेकर काफी कहा सुनी हुई थी नागपुर को बीच में हस्तछेप करना पड़ा था तब कहीं डेमेज कंट्रोल हुआ था अडवानी जी मोहन भगवत से मिलने नागपुर आये थे और मुलाकात की सफाई उन्हों ने कुछ इस तरह दी थी की मुझे पार्टी ने इतना प्यार दिया हे की वह प्रधानमंत्री के पद से ऊपर हे में इस पद के लिए यात्रा नहीं कर रहा हूँ . मेने अपनी यात्रा को सफल बनाने का आशीर्वाद संघ से ले लिया हे यह सफाई थी अडवानी की जो नागपुर में प्रेस के सामने आते ही उन्होंने खद दी थी किसी पत्रकार के पूछने पर यह जबाब नहीं था यह सफाई थी जो नागपुर बैठक के बाद अडवानी ने दी थी|
विवादित यात्रा शुरु होगई अडवानी ने अपनी यात्रा में जितना कांग्रेस को कोसना था कोसा पर साथ में यह जरुर बोलते रहे की यात्रा प्रधानमंत्री पद के लिए नहीं हे यात्रा सुशासन के लिए हे ,कालेधन के लिए हे , अडवानी के ये दोनों जुमले अधिकांश जनता को समझ में ही नही आये वो तो सभाओं में प्रधानमंत्री के नारे लगते रहे उमा भारती ने तो सभा में इस मुद्दे पर भीड़ से हाथ भी उठावा लिए काफिला बढता गया गुजरात पंहुचा वापी में फूलों की बारिस से अडवानी का स्वागत हुआ वापी की सभा में अडवानी ने मोदी की तारीफ की और जहाँ मोदी का नाम आया वहां आदर के साथ जी और भाई ,और नरेंद्र मोदी जी ही कहा उसी सभा में मोदी एक कुर्सी छोड़ कर बेठे थे सभा को संबोधित करते हुए मोदी ने सुशासन की चर्चा भी नहीं की जब भी अडवानीजी का नाम लेते वहां वो जी नहीं लगते थे सीधे अडवानी ही संबोधित करते थे सुनकर थोडा अजीब सा लग रहा था इस तरह की नाफर्मनियो के पीछे जो कसक थी वह किसी से छुपी नहीं थी कसमसाये मोदी बचापेई जी के अंदाज ने सभा को संबोधित तो कर रहे थे जहाँ मोका मिल रहा था वहां वो अडवानी को अपने से नीचा दिखा ही देते थे चतुर मोदी अडवानी की यात्रा की अड़ में अपने ही कसीदे खद बुन रहे थे |आज अडवानी जी का जन्म दिन हे उन्हें बधाई >>> जय हिंद
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