Thursday, 24 November 2011

महाबली को थप्पड़ पड़ा

महाबली को थप्पड़ पड़ा >>>>>>>>>>>>>सरदार के थप्पड़ की गूंज पूरे देश में  सुनाई पड़ी चारो  ओर उसकी कड़ी निंदा भी  की गई  विरोधियों  ने निंदा तो की पर सरदार के दुःख को भी  
                                                           जायज ठहरा दिया कांग्रेस का बयान सबसे हल्का था वह इस में राजनीती खोज रही थी की किसी  तरह भा जा पा पर इसका ठीकरा फोड़ दिया जाये और उसने किया भी यही कह  दिया  की सिन्हा के बयान से सरदार  को प्रेरणा मिली और पहला  जोरदार थप्पड़ पवार को पड़ा   मुलायम ने कहा यह हिंसा नहीं हे जनता का अकोश हे महगाई ओर बेरोजगारी का जीताजागता  नमूना हे| जिसे थपड पड़ा उसने घर  जाकर चेनलों को बयान दिया कि घटना  को भूल जाइये एसा क्यों कहा पवार ने सोचने  लायक बात हे  तमाम  बाहुबलियों को चेतावनी भी हे की हजारो करोड़ के नेतापतिओं   की आगे यही गति होना हे सचेत  जाओ| थप्पड़ की   गूंज चेनलनो के जरिये पूरे देश में गूंजती रही  महाराष्ट्र में तो थपड की आवाज  इतनी जोरदार थी  की जनता सड़क पर आगई नेशनल हाइवे जाम कर  दिया |महाराष्ट्र के बाहुबली को थप्पड़  घोर अपमान हे |अब जो भी कहो थप्पड़  तो पड़ ही गया हे बाहुबली की इज्जत मिटटी में मिल गई हे विरोधी मंद मंद मुस्करा रहे हें घडियाली अंशु  बहा रहे हें शरद जी घर में बेठे  गाल सहला रहे हें निंदाओं का दोर जरी हे गरमा गरम बहस चेनलों के लिए तैयार हे पिटे पवार  के कंधे पर बन्दुक रख नेता अपना अपना निशाना साध रहे हें पवार के लाल गल पर उभरी  सरदार की उँगलियों पर कोई मरहम लगाने तैयार नही हे |
मामला यहाँ थप्पड़ का नहीं हे मामला हे की युवक को गस्सा क्यों आया इतनी बड़ी गलती कर  युवक को बिलकुल भी  अफसोश नहीं हे  उसने कहा की सब चोर हें में मर्द हूँ और मरूँगा ये गुस्सा क्यों हे | जिस देश की जवानी बेरोजगार हो वहां सरदार जेसे करोड़ों युवक हे जो इन धनपति नेताओं से एसी ही नफरत करते हें हजारो करोड़ के  काले धान से  लबरेज इन नेताओं के  एयासी के किस्से जब ये युवक टी व्ही पर सुनते हे अख़बारों में पढ़ते हें और फिर वो अपने आपको तोलते हें नफरत का वायराश उसे वक्त उनके दिलो दिमाग पर तेरने लगता हे की   हमने क्या बिगाड़ा  हे  हमारे विकास की राशी इनकी तिजोड़ी में और हम सड़क पर यही हे  असली गुस्सा इन युवकों का जो पवार पर भरी पड़ा  महगाई को लेकर पवार के जो बयान आते थे वो मरहम की वजाय नमक ही छिड़कते थे जादू की छड़ी का जुमला इन्ही का था फिर धीरे -धीरे यह जुमला मनमोहन जी भी बोलने लगे मामला प्याज का  हो या चीनी का जनता की अदालत में  पवार ही घेरे में रहे  झल्लाए  पवार   उल जलूल बयान  देते रहे संवेदनहीनता  से दिए गए बयानों का ही फल हे जो पवार के गल पर तमाचे के रूप में उभरा हे पवार भले ही कोप भवन ने बेठे ये बयान दे  रहे हों के घटना को भूल जाया जय पर उनकी आत्मा इस वक्त गिलानी से भरी ही होगी कहावत हे की जिसको पड़ती हे पीर वही समझता हे 

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