Sunday, 12 February 2012

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1 comment:

  1. छत्तीसगढ़ के नाम पर अच्छे -अच्छों के मुख में पानी आ जाता हे >>>>>>>>>>>>वाकिया प्रेस क्लब देल्ली का हे कलब का हल किसी से छुपा नहीं हे पुराने कीमती फर्नीचर कि तरह बिखरे माहोल में एक यंग लेकिन वरिस्थ पत्रकार से पहला परिचय हुआ मेरा परिचय वो शोर शराबे के बीच वो सुन पाए कि नहीं यह पता नहीं मेजबान ने उनके खानपान की विधिवत घोषणा कर दी गई |
    अब हम सभी उस गंभीर चिंतन कि ओर चल पड़े जो दिल्ली में विकास का माईल स्टोन कहा जाता हे दिल्ली मेट्रो तारीफ के पुलों पर दोड़ती श्री धारण की मेट्रो उस बयान पर टिक गई जो हल ही में मेट्रो मेन ने कहा की उस वक्त की सरकार ने ठेका बदलने दबाब बनाया था कुल मिलकर लाबोलाबाब यही था की बीजेपी ने ठेका बदलने दबाब बनाया था श्री धारण ने ठेका नहीं बदला ठेके की बात आये ओर छत्तीसगढ़ का जिक्र ना हो-हो ही नहीं सकता उस पर मेट्रो का टापिक छत्तीस गढ़ आ ही गया चर्चा के घेरे में ओर वरिष्ट पत्रकार ने झट से कहा की छत्तीसगढ़ इकलोता एसा प्रदेश हे जिसका नाम लेते ही अच्छे अच्छों के मुह में पानी आ जाता हे मुह में पानी आना एक मुहावरा हे यह एसा मुहावरा हे जिसके अर्थ अनेक हें मश्लन इतनी मिठास हे छत्तीसगढ़ में की दिल्ली बेठे लोगों के मुह में छत्तीसगढ़ का नाम सुनते ही पानी आ जाता हे>>>>>> जय हिंद

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