Monday, 19 March 2012

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  1. राज्य सभा ओर उसके मोहरे >>>>> राज्य सभा के गठन के पीछे जो मकसद था की उस सदन में वे सदस्य होंगे जो देश के बड़े थिंक टेंक के रूप में जाने जाते हें मसलन. बुधुजिवी ,बकील ,पत्रकार ,डाक्टर ,अर्थशास्त्री ,समाजसेवी ,वैज्ञानिक ,उद्योपति ,शिक्षासस्त्री ,जिसे विद्वान उस सभा के मेंबर होंगे पर इन राजनेताओं ने उस पवित्र सदन को रखेल कि तरह उपयोग कर गधों कि फोज बेठा राखी हे ये बोधिक सम्पदा के अधिकार पर अतिक्रमण हे धूर्त पार्टिओं के अल कमानों का विधान सभाओं की स्वतिता का घोर अपमान हे चमचों ओर पैर पकड़ने वालों को इस सदन में भेज कर देश की बोद्धिक सम्पदा को नष्ट करने का षड्यंत्र हे जो बदस्तूर जरी हे गधे अपर हॉउस में बेठे हें जो लोअर हॉउस के घोड़ों की बची खुची घास को खाकर सदन में गंध फेला रहे हें राज्य सभा में एसे कितने सदस्य हे जिनको उनके कार्यों के लिए नहीं उनकी चमचा गिरी कर लिए जाना जाता हे छत्तीसगढ़ से जो भी इस सदन का मेंबर बना हे उनके बारे में यदि जाना जाये तो पता चलेगा की उनका इस देश या समाज या उनके दुवारा किये गए उत्क्रस्थ करों का कोई लेख्जोख नहीं हे नजाने कहाँ से पकड़ कर उनको लाया गया हे ओर उस सदन का मेंबर बना दिया गया हे राज्य सभा में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वालों ने आजतक छत्तीसगढ़ के बारे में कुछ कहाही नहीं कहते भी केसे गधे को शेर कि खाल पहना देने से वह शेर नहीं हो सकता सभी जानते हें >>>>>>>>>> जय हिंद

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