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निशा घाटी का नशा >>>>>रायपुर से 180 km दूर उड़ीसा की सीमा से लगी निशा घाटी ने हमें मदहोस करदिया महुआ के पेड़ों से भरी घाटी में हम जब पंहुचे तो महुए के फूलों की महक से घाटी सराबोर थी मदहोस कर देने वाली खुशबु ने हमारी थकन को तो दूर कर ही दिया कला चाँद बेगा ने हमारा स्वागत किया घनघोर जंगल में ऊँची पहाड़ी से गिरते झरने के किनारे बांस ओर पत्तों की इस झोपडी में बैठ कर हम बेगा से निशा घटी कि जानकारी ले ही रहे थे कि बेगा की पत्नी ने भुने हुए महुआ फूलों के साथ महुए के रस को दोना में हमारे सामने परोस दिया उसने अपने भाषा में जो के उड़िया में बोल रही थी आगाह किया कि हम उसकी बोली तो नहीं समझ रहे रहे थे पर उसके हाव भाव से लगा रहा था की जो कुछ हे ग्रहण करें मेने जीवन में पहली बार भुने हुए महुओं के फूलों का स्वाद लिया रस पीने में पहले तो काफी कठनाई हुई पर थोड़ी देर में सब सामान्य हो गया टूटी फूटी हिंदी ओर उनके हाव भाव से हम ने बातचीत का सिलसिला जरी रखा महुआ रस का आन्नद जब धीरे से अपने शबाब पर पंहुचा तो हम घटी के झरने का आनन्द लेने उसके गर्भ ग्रह में पहुचे एक घंटे ही बीते होंगे आन्नद लेते हुए करीब दो बजे थे की दूर से नगाड़ों की आवाज ओर जंगली पक्षियों के शोर ने हमारे आनन्द में खलल डाली तभी कला चाँद भागता हुआ हमारी ओर आया ओर तुरत झरने से बहार निकलने ने को कहा हम कुछ समझ पाते अन्न फानन में झरने के बहार निकले ओर करीब भागते हुए उसकी झोपड़े के पास आकार रुके ही थे की उस झरने के पास बीस से भी अधिक भालुओं का एक झुण्ड झरने के अस पस हमारे छोड़े हुए सामान जिसमे मिनरल वाटर बिस्कुट नमकीन के पेकिट सिगरेट से भरे पिलास्तिक के थेलों की चिर फाड़ करने में जुटे भालुओं को हम देख रहे थे भालुओं की इस टोली को देख जहा हमारी सांसे फूली हुई थी वहीँ हमारी रक्षा के लिए बेगा अपनी तईयारी में लगा हुआ था उसने हम सभी को लकड़ी मसलें थमा दी जो उस वक्त जली नहीं थी कला चाँद ने कहा की अब यहाँ ठहरना ठीक नहीं ये भालू जल्दी से भागने वाले नहीं हें झोपडी से दूर पहाड़ी की दालान पर हमारी गाड़िया खाड़ी थीं सो हम बिना जली मसलों के साथ दहलन की ओर चल दिए इस भागम भाग में हमारे मित्र का मोबाईल वहीँ झरने के पास छुट गया था चलते चलते मेने उसके मोबाईल पर डायल किया घंटी बजी हमने दूर से पलट कर देखा तो हमें लगा की भालू अचानक जिस तरफ से आये थे उसी दिशा में भाग रहे हें इस भागते हुए नज़ारे को देख कर हम ठहर गए घंटी का जाना बंद हुआ मेने फिर से डायल किया घंटी पुनः जा रही थी हमें भालू भागते नजर आ रहे थे बड़ा ही अजीब माहोल था हमने मित्र से पूछा की कोन सी टोन हे जो भालुओं को डरा रही हे अब हिम्मत हो तो जाओ ओर मोबाईल उठा लाओ मोबाईल का लालच भी था बेगा को तैयार किया कि इसे कुछ पेसे का लालच दो तो शयद बात बने पर हमने ध्यान से दिखा भालू जादा दूर नहीं भागे थे सो मोबाईल की बलि चढाई ओर वापिस सोहिला पंहुचे
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ReplyDeleteनिशा घाटी का नशा >>>>>रायपुर से 180 km दूर उड़ीसा की सीमा से लगी निशा घाटी ने हमें मदहोस करदिया महुआ के पेड़ों से भरी घाटी में हम जब पंहुचे तो महुए के फूलों की महक से घाटी सराबोर थी मदहोस कर देने वाली खुशबु ने हमारी थकन को तो दूर कर ही दिया कला चाँद बेगा ने हमारा स्वागत किया घनघोर जंगल में ऊँची पहाड़ी से गिरते झरने के किनारे बांस ओर पत्तों की इस झोपडी में बैठ कर हम बेगा से निशा घटी कि जानकारी ले ही रहे थे कि बेगा की पत्नी ने भुने हुए महुआ फूलों के साथ महुए के रस को दोना में हमारे सामने परोस दिया उसने अपने भाषा में जो के उड़िया में बोल रही थी आगाह किया कि हम उसकी बोली तो नहीं समझ रहे रहे थे पर उसके हाव भाव से लगा रहा था की जो कुछ हे ग्रहण करें मेने जीवन में पहली बार भुने हुए महुओं के फूलों का स्वाद लिया रस पीने में पहले तो काफी कठनाई हुई पर थोड़ी देर में सब सामान्य हो गया टूटी फूटी हिंदी ओर उनके हाव भाव से हम ने बातचीत का सिलसिला जरी रखा महुआ रस का आन्नद जब धीरे से अपने शबाब पर पंहुचा तो हम घटी के झरने का आनन्द लेने उसके गर्भ ग्रह में पहुचे एक घंटे ही बीते होंगे आन्नद लेते हुए करीब दो बजे थे की दूर से नगाड़ों की आवाज ओर जंगली पक्षियों के शोर ने हमारे आनन्द में खलल डाली