Tuesday, 25 October 2011

(68) Anna Hazare

(68) Anna Hazare:
अन्ना वास्तु दोष मिटने अपने पुराने कमरे में चले गए ,फिर भी उनकी टीम पर वास्तविक दोष लगते ही जा रहे हें , किरण वेदी ने जो किया वह बह एक मानवी भूल नहीं थी,वो एक आदत थी जो हार सरकारी अधिकारी को होती हे वह शुरु से ही यात्राओं में हिराफेरी करता रहा हे टी ये डी ये में हेराफेरी के वो मास्टर होते हें विभाग में तो बाकायदा एक एसा बाबु होता हे जो इस तरह कि हेराफेरी का मास्टर पिस होता हे जो तमाम साहबों का यात्रा बिल इसी तरह से पेस कर साहब को इनकम करवाता रहता हे ओर उनके परिवार को सरकारी खर्चे पर यात्रायें करवाता रहता हे| किरण कि इस तरह कि यात्रायें आदत के तहत ही हई हे किरण वेदी को पता नहीं था की वे इस जन आन्दोलन में अन्ना की टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएँगी वो तो चुपचाप अपनी दुकान चलरही थीं जेसे दुसरे एन जी ओ चलते हें भारत में एसे सेकड़ों अधिकारी हें जो सरकारी नोकारियों में रहकर मजे मरते रहे ओर फिर जब सरकार ने उनकी सुनना बंद कर दी तो वे सरकार पर इल्जाम लगा कर एन जी ओ में चले गए खुद कि खोल ली नहीं तो किसी विदेशी एन जी ओ में शामिल हो गए ओर सत्ता के सोफष्टिकेतिक दलाल की भूमिका में आ गए |
.किरण वेदी कि नियत कहीं ख़राब नहीं थी उनकी नीति ख़राब हो सकतीं हे वह उनकी आदत का हिस्सा हे सो इस तरह की आदतें कभी कभी इतना बबल खड़ा कर देती हें कि लेने के देने पड जाते हें| किरण वेदी अकेली नहीं हें इस तरह की हेराफेरी में सेकड़ों अधिकारी फसे हैं पर मानते ही नहीं परिवार को सरकरी यात्रा करवाने से, छतीसगढ़ में तो यह आम प्रचलन में हे सरकार से झूट बोलकर यात्रा करना जन कहीं दर्शाना कहीं |
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