Thursday, 20 October 2011

Gmail - शरद पवार ने अपना मुह तब खोला हे जब उन्हें लगा की २ जी के चकर में वे भी ना - achoubey242@gmail.com

Gmail - शरद पवार ने अपना मुह तब खोला हे जब उन्हें लगा की २ जी के चकर में वे भी ना - achoubey242@gmail.com:

'via Blog this'शरद पवार ने अपना मुह तब खोला हे जब उन्हें लगा की २ जी के चकर में वे भी ना चकराने लगें |सिघवी ने कहा बोलने की आजादी हे बोलें, पर सोच समझकर बोलें |इतहास गवाह हे की मराठों ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया हे , जेसे ही मतलब निकला कि तुरत पला बदल लेते हें| पिछले ८ वर्षों से सरकार में रहकर मजा मार रहे पवार ने पैंतरा बदलना शुरु करदिया हे| पेंतारा बदलने के पीछे दो अहम् कारण हें पहला दादा जो की यू पी ए में नंबर दो पर हें पवार उन्हें पचा नहीं पा रहेहें | दूसरा चुनाव हुए तो कांग्रेस की छव आने वाले चुनाव में फजीहत ना करा दे |
पवार हमेशा पावर गेम खेलते हें वो बिना पावर के रह हे नहीं सकते उन्हें भी लग रहा हे की कांग्रेस की लुटिया डूबने वाली हे सोउन्हों ने अभी से अपना दांव खेलना शुरु करदिया हे| वेसे जितने भी घटक दल हें वो किसी बड़े दल को तभी समर्थन देता हे जब तक उनके तमाम स्वार्थों की पूर्ती होती रहती हे आज तक जितनी भी गठबंधन की सरकारें बनी हें बेशक उन में सबसे कमजोर यू पी ए २ ही रही हे |मनमोहन सिह भले ही देश के अर्थ शास्त्र में फेल रहे हों पर कांग्रेस ओर उनके घटक दलों के लिए तो वरदान साबित हुए हें उनकी अर्थनीति से उन तमाम बाहुबली नेताओं को बल मिला जिनकी ओकात सो ,दो सो करोड़ घूस पचाने की नहीं थी, वो हजारों करोड़ डकार गए , एक ने तो हद ही करदी सोने के सिंहासन पर ही बैठ गया,घुस का रावण हो गया रेडी बंधुओं के यहं छपे में जो कुर्सी मिली वह सोने की थी जिस पर बैठ कर वो आयरन ओर एसे बेच रहे थे जेसे उनके बाप का मॉल हो
बात चल रही थी पवार के पावर की दादा से लेकर माम्नोहन सिह तक कह दिया सब कमजोर हें फूली हुई कमजोर नाश कि ओर इशारा भी कर दिया की इनकी कमजोरी के कारण न्यायपालिका सरकार पर हावी होगई हे महंगाई से पल्ला झडते हुए कहा की हम तो किसान हें महंगाई के बारे में दादा जाने ये वो शरद पवार हें जिनके कायर्काल में इनकी गलत नीति के करण प्याज के अंशु पूरे देश ने रोये ,शक्कर पर तो बाकायदा आरोपों के घेरे में आये बाहुबली होने के कारण मामला जादा तूल नहीं देपाया ये अलग बात हे पर विवादों में तो रहे ओया जनता ने ६० रूपया किलो चीनी खरीदी , इनकी नीतियों के चलते लाखों किसानो ने आत्महत्या की वो आज बोल रहे हें की सरकार कमजोर हे उनका कहने का कुल मिला कर यही मतलब हे की आब चलो कोई मजबूत ठीहा अभी से खोज लिया जाय

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