नेतानार के नक्सली हमले में ६ जवान घायल ओर ६ शहीद हो गए हें , नक्सलीओं ने चारा डालकर जवानों को लुभाया ओर जब जवान घिर गए तो ५०० से अधिक की तादात में नक्सलीओं ने हमला बोल दिया चारा से मेरा मतलब हे की घटना की बीती रात को नक्सलीओं ने गावं में भरी उत्पात मचाया था इलाके में अपनी उपस्तिथि दर्ज कराइ थी , वन विभाग के चोकीदरों को बंधक बनाया, फर्नीचर में आग लगाई, ओर उसकी सूचना भी भिजवाई दी ताकी सर्च पार्टी उन्हें खोजे ओर वे उन पर हमला बोलें उनकी चल सफल रही सूचना के अधार पर जब जवान सर्चिंग पर निकले तो उन्हें जवानों को जाने दीया जब वे सर्च कर लोट रहे थे तो घात लगाकर हमला बोल दिया जिस में ६ जवान शहीद हो गए |
भीड़ के आकर में हमला करना ये माओ का सबसे पुराना , सरल ओर सफल तरीका हे, चीनी फोजें इसका खूब इस्तमाल करती हें मुझे याद हे की जब चीन से हमारा वार हुआ था तो प्रमुख ख़बरों में एक खबर ये भी रहती थी की चीनी सेना की संख्या इतनी हे की हम मरते मरते थक गए हें असला भी काम पडरहा हे, भीड़ में किया गया हमला सामने वालों पर मनोवज्ञान असर डालता हे अच्छे -अच्छे जोधा इस तरह के हमलों में ढेर हो जाते हें |
मेरी समझ में ये नहीं आ रहा हे की जब नक्सलीओं की उपस्तिथि वहां थी तो इस सर्च पार्टी को पीछे से कवर क्यों नहीं किया गया |ये आम बात हो गई हे की नक्सली भीड़ की शक्ल में ही हमला बोल रहे हें, तो प्रश्न उठता हे की बिना कवर के इन१६ जवानों को इस तरह केसे जाने दिया, इन जवानों के पीछे यदि दो, तीन कवर पार्टियाँ ओर होती तो हमले का अंजाम कुछ ओर होता घटना के दो घंटे बाद तक सहायता ना मिलना जवानों का मिडिया से अनुरोध करना ये सब दर्शाता कि बिना कवर के जवान फिल्ड पर भेजे गए उनकी शुध लेने वाला कोई नहीं था |
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