'via Blog this'लोकायुक्त >>>> के मामले में जो कहा गया हे वह ठीक हे, आठ वर्ष का समय काफी लम्बा समय होता हे संविधानिक पद के रिक्त होने का, इस मामले में सरकार संदेह के दायरे ने आ ही जाती हे मोदी इस मामले में पिछड़ गए ,आइ पी एस अधिकारी के मामले में भी मोदी जादा दिन टिक नहीं पाएंगे कानून ठोस शाबूत मागेगा ओर जाँच एजेंशिया शाबूत दे नहीं पाएंगी जिस आरोप में सस्पेंड किया हे वह डी ई के स्तर का मामला हे एक एसे कनिष्ट अधिकारी कि रिपोर्ट पर अपराध दर्ज हुआ हे जो कहता हे कि दबाव में शपथपत्र दिया था ताजुब हे पढ़ा लिखा अधिकारी दबाब में शपथ पत्र जरी कर देता हे ?क्या आज भी उसपर भरोषा किया जा सकता हे कि वह आज दबाब में ना हो कल फिर कह दे की दबाब में था
राम भक्त मोदी जी के उपवास में कहीं चूक होगई हे या फिर किसी कि नजर लग गई हे उपवास कि घोषणाके साथ ही तमाम तरह के विवाद सिर उठाने लगे ओर मोदी जी उपवास पर उपवास करते रहे दिल्ली ना जाने परभी विवादों में घिरे| मोदी कि हालत इन देनो कुछ एसी हे कि >>>> अंदाज अपने आईने में देखते हें वो ओर ये भी देखते हें कोई देखता ना हो
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