'via Blog this'कलयुगी रावण का कल अंत हो गया ४१ वर्षों के इस रावण ने तेल बेच कर १८३ टन सोने का भण्डारण किया था यही सोना उसकी मोत का कारण बना |
विद्रोह के बाद जब उसने त्रिपोली छोड़ा तो वह अपने साथ इस सोने के भंडार को भी लेकर भगा, ख़बरें आ रही थीं की गदाफी भगा तो काफले की सकल मेंहे सुनकर बड़ा अजीब लगा इस मुस्किल घडी में भागते वक्त आमतोर पर भागने वाले जरुरत का ही सामान लेकर भागते हें पर लालची गदाफी १८३ टन सोने के साथ भगा ओर मारा गया | कहते हें की >>कनक ,कनक से सो गुनी मादकता अधिकाय या पाए बोरत हे वा पाए बोराय << इस का मोटा मोटी मतलब यही हे की अति का अंत ठीक नहीं हे वेसे तो सोने की तासीर कुछ एसे ही होती हे की मानव उसकी मोहमाया से छुट नहीं पता इतने बड़े भंडारण को देख कर वह अहंकारी होजाता हे ओर रावण की तरह व्योहार करने लगता हे गदाफी की एयासी किसी से छुपी नहीं हे कलयुगी रावण की भूमिका में गदाफी बिलकुल फिट बेठता हे , जिस दिन से उसने सोने का भंडारण शुरु किया था उसी दिन से उसने अपने हाथों अपनी मोंत की तिथि ओर कारण दोनों ते कर लिए थे
मरने से पहले गदाफी काफी डरा हुआ था गिड गीडा रहा था मतलब वो बहुदर तो था नहीं सो मारा भी तो गीदड़ की मोंत | तेल साम्राज्य के महाबली का अंत
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