Monday, 10 October 2011

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Aआखिर अडवाणी की यात्रा शुरु हो ही गई नरेंद्र मोदी .ना सही सुसील मोदी सही मोदी तो हे अडवाणी के साथ मोदी जुड़ा ही रहता हे| बड़े मोदी ने यात्रा का विरोध कर यह संदेस तो दे हे दिया था की बस बहुत होगयाअडवाणी थोडा तो सकते में तो आयेथे पर जल्दी संभल गए फ़ौरन नागपुर आये आशीर्वाद लिया ओर शपथ भी ली कि में प्रधानमंत्री की कुर्शी की ओर देखूगा भी नहीं शपथ काफी कठिन थी फिर भी ली
टीम अडवाणी ने यात्रा की तयारी शुरू कर दी| इस बीच बड़े मोदी के चोचलों के चर्चायों का दोर चलता रहा अडवानी ने बड़ी सहजता से मोदी को झेला यात्रा का आज प्रथम चरण हे दस बजे शुभ महूर्त पर यात्रा का शुभारम्भ हो गया हे
यात्रा का नाम जनचेतना यात्रा रखा गया हे जनचेतना के मायने भी बतलाये गए हें १ शुशासन २ साफ छवि ३ पारदर्शिता फीर भ्रष्टचार से मुक्ति>> आदी आदी बहुत से मायने हें इन सभी मायनो पर तो जनचेतना जगाना हे पर प्रधानमंत्री की कुर्सी की ओर देखना भी नहीं हे बड़ी मुसकिल में हें अडवाणी कुर्सी पर बेठने से पहले लगे करेंट से भयभीत हें एक बड़े टी वी चेनल ने तो हद ही कर दी उम्र की गिनती बतलाकर कह दिया अडवाणी का अंतिम समय हे इसके बाद वो कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पायेगें उधर मोहन बागवत ने चेता दिया हे की कुर्सी की ओर दिखना भी नहींहे इस सब के बाउजुद अडवाणी पूरी तन्मयता से गाजे बजे के साथ यात्रा को सफल बनाने में लगे हुए हें वाकई अडवाणी जी ओल्ड यंग मेन आर्मी हें बी जे पी के
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